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आर्थिक मदद मिले तो यह खिलाड़ी दिखा सकता है अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में जौहर

गांव के छात्र का चयन बांग्लादेश में अंतरराष्ट्रीय योग प्रतियोगिता के लिए हुआ है, कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते वह भाग लेने में असमर्थ

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international Yoga Competition, Need financial support

बालोद. जिले के सोरर गांव के शासकीय स्कूल के छात्र का चयन बांग्लादेश में होने वाली अंतरराष्ट्रीय योग प्रतियोगिता के लिए हुआ है, लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते वह इसमें भाग लेने में खुद को असमर्थ पा रहा है।

15 बच्चे राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कर चुके हैं योग कला का प्रदर्शन
सोरर गांव के सरकारी स्कूल के करीब 15 बच्चे राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अपनी योग कला का प्रदर्शन कर चुके हैं, जिसमें इन्हें कई मैडल मिल चुके हैं। इनमें से दो भाई गजेंद्र कुमार और दिलेश्वर कुमार का चयन नेपाल में हुई अंतरराष्ट्रीय योग प्रतियोगिता के लिए हुआ था, लेकिन घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने के कारण ये बच्चे अपने कौशल का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं कर पाए। इन बच्चों को शासन-प्रशासन की ओर से किसी तरह की कोई मदद नहीं मिल पा रहा है।

प्रतिभाएं आर्थिक मदद के अभाव में महज गांव तक ही सिमटकर रह जा रही

बहरहाल प्रदेश सरकार खेल और खिलाडिय़ों को लेकर कई तरह की योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन सरकार की योजनाएं ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में शिथिल नजर आती हैं। इसके कारण ग्रामीण इलाकों की प्रतिभाएं आर्थिक मदद के अभाव में महज गांव तक ही सिमटकर रह जा रही हैं।

इस बार फिर मिला है प्रतिभा दिखाने का मौका, पर...

अब एक बार फिर दिलेश्वर कुमार का चयन बांग्लादेश में होने वाली अंतरराष्ट्रीय योग प्रतियोगिता के लिए हुआ है, लेकिन वह इसमें भी शायद ही भाग ले पाए, क्योंकि आर्थिक स्थितियां उसकी राह में आज भी रुकावट है। वह प्रयासरत है कि उसे सरकार की तरफ से आर्थिक मदद मिल जाए, ताकि वह इस प्रतियोगिता में भाग लेकर अपने गांव, जिला और प्रदेश के साथ देश का नाम रौशन कर सके।

नहीं मिली मदद
इससे पहले भी उसका और उसके भाई का चयन नेपाल में हुई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा के लिए हुआ था, लेकिन पैसों की व्यवस्था नहीं होने के कारण वे नहीं जा पाए। शासन-प्रशासन ने भी इन्हें किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली।

स्कूल के पास नहीं है फंड

शासकीय स्कूल सोरर के प्राचार्य बीआर ठाकुर भी मानते हैं कि इन बच्चों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण ये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूल के पास इतना फंड नहीं है कि वह इन बच्चों की मदद कर पाए। ठाकुर का कहना है कि वे कोशिश करेंगे कि जनसहयोग से राशि एकत्र कर बच्चे को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भेज सके।