
जनेऊ धारण के बाद 26 बटुक बने द्विज, सामूहिक विवाह और परंपराओं को बचाने ब्राम्ह्ण समाज ने दिया जोर
बालोद. जिला अखंड ब्राह्मण समाज बालोद में पहली बार बड़े कार्यक्रम में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में 26 बाटुकों का उपनयन संस्कार किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में समाज के प्रदेश व जिला स्तर के पदाधिकारियों ने समाज के प्रति पीड़ा भी व्यक्त की। कहा देश में आरक्षण जाति के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक आधार पर निर्धारित हो। आरक्षण की वजह से योग्य युवाओं को भविष्य निर्धारण में अवसर नहीं मिल पा रहा है। वक्ताओं ने इस दौरान सामूहिक विवाह और परंपराओं को बचाने पर जोर दिया।
वैदिक विधि-विधान से 26 बटुकों का उपनयन संस्कार
बस स्टैंड स्थित रेस्टॉरेंट में हुए कार्यक्रम में वैदिक विधि-विधान से 26 बटुकों का उपनयन संस्कार कर उसे कर्मकांड के योग्य बनाया गया। अब ये बटुक ब्राह्मण कहे जाएंगे, जो धार्मिक अनुष्ठान के अधिकारी हो गए हंै। अंत में समाज के सदस्यों ने शाम 6 बजे बाजे-गाजे के साथ भगवान परशुराम की शोभायात्रा निकली जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। आयोजन में प्रदेश महासचिव संजय शुक्ला, नारी प्रकोष्ठ की प्रदेश सचिव निशा तिवारी आदि के साथ स्थानीय संगठन के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
योग्य युवाओं को नहीं मिल रहा रोजगार का अवसर
इस आयोजन में छत्तीसगढ़ अखंड ब्राह्मण समाज के प्रांत अध्यक्ष योगेश तिवारी ने कहा ब्राह्मण समाज हर क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहा है। इस दौरान उन्होंने पीड़ा व्यक्त की कि देश में आरक्षण के पेंच से समाज पिछड़ रहा है। योग्य युवाओं को अपनी शिक्षा योग्यता को साबित करने का मौका नहीं मिल पा रहा है। आरक्षण के कारण ही समाज के लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने शासन-प्रशासन से कहा कभी भी आरक्षण जाति के आधार पर न दें। आरक्षण को आर्थिक आधार पर तय करें। तिवारी ने कहा जाति के आधार पर आरक्षण से ब्राह्मण समाज के युवाओं की पीड़ा बढ़ती जा रही है। वे अपनी योग्यता साबित नहीं कर पा रहे हैं। कार्यक्रम में दुर्ग जिला ब्राह्मण समाज दुर्ग के संरक्षक संतोष उपाध्याय, शरद शुक्ला, लाखेश्वर पाण्डेय, पार्षद मंजू शर्मा, प्रकाश उपाध्याय, वरिष्ठ संजय शर्मा, गुंडरदेही के संजय शर्मा आदि सम्मिलित हुए।
नन्हे ब्राह्मण अब पढ़ सकेंगे कर्मकांड
इस आयोजन में प्रदेश भर से 26 बटुकों का उपनयन संस्कार किया गया। विधि-विधान से मंडप सजाया गया, परिजन ने मंत्रोच्चार के साथ बटुकों को हल्दी-तेज लगाए। उसके बाद विभिन्न क्रियाकलापों से गुजरने के बाद हवन यज्ञ व यज्ञोपवित के साथ जनेऊ संस्कार किया गया। उसके बाद अब ये ब्राह्मण वैदिक मंत्रों के साथ कर्मकांड करा सकते हैं।
समाज छत्तीसगढ़ की परंपरा, संस्कृति को आज भी जिन्दा रखे हुए
अखंड ब्राह्मण समाज के प्रदेश महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष भारती किरण शर्मा ने कहा सामाज आज सभी जातियों को लेकर काम कर रहा है। समाज के लोग किसी भी समाज की गरीब लड़कियों की शादी में सहयोग दे रहा है। यहां तक उसकी शादी का खर्च भी उठा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज छत्तीसगढ़ की परंपरा, संस्कृति को आज भी जिन्दा रखे हुए है। समय-समय पर विविध आयोजन के साथ स्कूलों में बच्चों को कॉपी-पेन सहित अन्य पाठ्य सामग्री का वितरण अभियान, स्वास्थ्य शिविर, सिलाई-कढ़ाई, पौधरोपण के साथ अपनी संस्कृति को बचाने के लिए धार्मिक आयोजन का भी आयोजन किया जाता है।
रिश्तों की महत्ता पर रखी जाएगी कार्यशाला
समाज ने चिंता व्यक्त की कि हमारी सोच व रिश्ता निभाने में कहीं न कहीं कमजोरी आई है। इसलिए आज समाज में रिश्ते टूटने की घटनाएं बढ़ी है। टूटते रिश्ते को लेकर जल्द ही बड़ा सेमिनार का आयोजन कर समाज व परिवार के बीच रहकर जीवन जीने में जो आनंद है वह अकेले रहने में नहीं है, इस विचार पर जोर दिया जाएगा।
आरक्षण पर विचार करें
प्रांताध्यक्ष योगेश ने जानकारी दी कि समाज आज प्रदेश की संस्कृति, प्रदेश का पारंपरिक व्यंजनों को बचाने सहित जनहित और गरीबों के हित के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा पर शासन-प्रशासन भी समाज को आगे बढ़ाने में अपना सहयोग करे और आरक्षण पर विचार करें।
खर्चीली शादी को रोकने प्रयास अति आवश्यक
समाज के जिला अध्यक्ष लोमेश शर्मा ने कहा कि यह ऐतिहासिक प्रयास है। समाज अब नया प्रयोग करेगा। इस आयोजन के जरिए एक बड़ी योजना बना रहे हैं जिसमें समाज में भी अब सामूहिक विवाह का आयोजन करेंगे। खर्चीली शादी को रोकने प्रयास अति आवश्यक है। समाज को मजबूत और संगठित करने के लिए ऐसे आयोजन अति आवश्यक हो गया है।
जनेऊ संस्कार ही हमें द्विज बनाता है
इस अवसर पर विप्र प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रमुख मनोज पाण्डेय ने कहा कि जनेऊ ही हमें दिव्यता प्रदान कराता है। जनेऊ संस्कार ही हमें द्विज बनाता है। पर जनेऊ संस्कार के साथ आगे जीवन में नियमित जनेऊ धारण और उसके नियमों का पालन आवश्यक है। प्रत्येक ब्राह्मण को नियमित संध्योपासना, गायत्री जप करना चाहिए। उन्होंने आज की पीढ़ी के संस्कार से दूर भागने की स्थिति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने इसके लिए माता-पिता को सचेत करते हुए बच्चों के संस्कार पर जोर दिया। नई पीढ़ी को धर्म, संस्कार, उपासना की शिक्षा देने शीघ्र ही विप्र प्रकोष्ठ प्रत्येक जिले में शिविर आयोजित करेगा।
Published on:
04 Jul 2018 12:03 am
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