बालोद

वर्मी कंपोस्ट पैकिंग करने महिलाएं बना रही प्रिंटेड बोरी, अब तक 1.40 लाख का लाभ कमा चुकी

गुंडरदेही ब्लॉक की ग्राम पंचायत गब्दी में श्री गणेशाय स्व-सहायता समूह की महिलाएं इन दिनों गांव में गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में बनाएं जा रहे वर्मी कम्पोस्ट की पैकिंग के लिए प्रिंटेड बोरी का निर्माण कर रही हैं। इससे महिलाओं ने 1 लाख 40 हजार रुपए का लाभ कमा चुकी हैं।

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वर्मी कंपोस्ट पैकिंग करने महिलाएं बना रही प्रिंटेड बोरी, अब तक 1.40 लाख का लाभ कमा चुकी

बालोद. गुंडरदेही ब्लॉक की ग्राम पंचायत गब्दी में श्री गणेशाय स्व-सहायता समूह की महिलाएं इन दिनों गांव में गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में बनाएं जा रहे वर्मी कम्पोस्ट की पैकिंग के लिए प्रिंटेड बोरी का निर्माण कर रही हैं। इससे महिलाओं ने 1 लाख 40 हजार रुपए का लाभ कमा चुकी हैं। समूह की ओर से प्रिंटेड बोरी में जिले के सभी गौठानों में वर्मी कंपोस्ट की पैकिंग हो रही है। जिला प्रशासन ने भी समूह के कार्यों की सराहा है। ये महिलाएं अन्य समूह के लिए आदर्श बनी हुई हैं।

2020 से कर निर्माण, बजार से कम दाम पर मिल रही
जिले में गोधन न्याय योजना की शुरुआत हुई। गौठानों में वर्मी खाद का उत्पादन प्रारंभ हुआ। गौठानों में बोरियों की जरूरत पड़ी, जिसे अत्यधिक मूल्य में क्रय करना पड़ता था, तब समूह ने वर्मी खाद के लिए बोरी निर्माण का निर्णय किया। जिला प्रशासन ने समूह को मशीन उपलब्ध कराई। समूह की दस महिलाएं बोरी का निर्माण कर रही हैं।

अब तक 73 हजार बोरियों का कर चुकी हैं निर्माण
महिला समूह की संतोषी ने बताया कि जिला प्रशासन के सहयोग से मिली मशीन के बाद बोरी निर्माण के लिए प्रशिक्षण लिया। कच्चे माल एवं अन्य अतिरिक्त खर्च के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश कोष एवं बैंक लिंकेज के माध्यम से पैसों की व्यवस्था हुई। अब तक कुल 73800 बोरियां बेच चुकी हैं। बोरियां गुंडरदेही विकासखंड के अलावा गुरुर, बालोद, डौंडी, डौंडीलोहारा समेत अन्य जिलों में भी आपूर्ति की जा रही है।

हम दे रहे हैं 12.50 रुपए में
समूह की सदस्यों ने बताया कि बोरी बनाकर बेचने से महिला समूह को शुद्ध 1.40 लाख रुपए का लाभ हुआ है। पहले खुले बाजारों में यह बोरी 18-20 रुपए में मिलती थी। हम 12.50 रुपए में विक्रय करते हैं।

गौठानों में हो रही सप्लाई
संतोषी ने बताया कि हमारी बोरियां सभी गौठान में आपूर्ति की जा रही है। पहले आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। कर्ज लेकर कार्य करना पड़ता था। अब हमें पूर्णकालिक रोजगार की प्राप्ति हो गई है, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। हमें कार्य करने गांव से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। समूह की आय में वृद्धि हो रही है, जिससे वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों में सहभागी बन रही हैं।

Published on:
08 Feb 2023 10:46 pm
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