ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दो साल के अभूतपूर्व उत्साह के बाद जोखिम उठानेवाले निवेशकों ने सावधानी के साथ कदम वापस ले लिया।
ट्रैक्सकॉन के मुताबिक, फंडिंग के अभाव से स्टार्टअप्स कंपनियों की तादात में लगातार गिरावट आ रही है। आंकड़े बताते हैं कि 2015 में 9,462 से ज्यादा स्टार्टअप्स की स्थापना हुई थी जिनमें गैर-तकनीकी क्षेत्र में काम करनेवाली कंपनियां भी शामिल हैं, वहीं इस साल महज 3,029 स्टार्टअप्स ही शुरू हो पाए। गौरतलब है कि ट्रैक्सकॉन स्टार्टअप्स कंपनियों पर नजर रखती है।