
बाहुबली स्वामी के चरणों में 57 फुट लम्बी राखी समर्पित
श्रवणबेलगोला. प्रज्ञासागर मुनि की प्रेरणा एवं सान्निध्य में भक्तों ने 57 फुट लम्बी मनोहारी राखी विंध्यगिरी पर्वत पर ले जाकर बाहुबली स्वामी की विशाल प्रतिमा के चरणों में समर्पित की। इस 57 फुट लम्बे पचरंगे जिनधर्म ध्वजा से सजाई अदभुत अनोखी राखी में भगवान बाहुबली स्वामी, भद्रबाहु स्वामी के चरण, आचार्य वर्धमान सागर, समाधिस्थ आचार्य वासुपूज्य सागर, महावीर स्वामी, स्वस्ति चारुकीर्ति स्वामी, श्रवणबेलगोला में चातुर्मासरत 125 से भी अधिक साधु-संतों के चित्र समाहित हैं।
इस अवसर पर प्रज्ञासागर ने कहा कि रक्षाबंधन मात्र भाई-बहन का पर्व नहीं, बल्कि साधु-संतों की रक्षा का दिन है। पिच्छी कमंडल की रक्षा का दिन है। तीर्थ रक्षा का दिन है, इसलिए मैं इसे मुनि रक्षा दिवस भी कहता हूं जिसे जैन परमपरा में वात्सल्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। मठ में भंडार बसदी में भी स्वस्ति चारुकीर्ति स्वामी द्वारा आचार्य वर्धमान सागर, आचार्य सुविधि सागर सहित आचार्य संघ, उपाध्याय उर्जयन्त सागर, प्रज्ञासागर मुनि, अमरर्कीति अमोघकीर्ति सहित अनेक साधु-संतों की निश्रा में रक्षाबंधन पर्व संपूर्ण मठ के चौबीसी मंदिर को चारों तरफ से 700 श्रावकों द्वारा रक्षा सूत्र बांध कर वात्सल्य पर्व मनाया गया।
जीवन में बहार लाते हैं उत्सव
बेंगलूरु. तेरापंथ भवन, गांधीनगर में साध्वी कंचनप्रभा ने रक्षाबंधन पर्व पर कहा कि भारत की धन्य धरा पर्व प्रधान है। यहां आध्यात्मिक पर्व जहां जीवन में श्रद्धा, संयम, अनुशासन तथा विनय प्रतिष्ठित करते हैं, वहीं सामाजिक पर्व भी जीवन में बहार लाते हैं।
उनमें रक्षाबंधन पर्व भी एक है। भ्राता भगिनी के स्नेहिल व्यवहार पूरे परिवार में रौनक भर देते हैं। साध्वी मंजूरेखा ने कहा कि रक्षाबंधन पर्व सामंजस्य, सौहाद्र्र तथा परस्पर सात्विक संवेदना को जीवन में प्रतिष्ठित करता है। साध्वी उदितप्रभा, साध्वी निर्भयप्रभा, साध्वी चेतनाश्री के साथ मंजूरेखा ने सुमधुर गीत के साथ भाई बहन का संगीतमय परिसंवाद प्रस्तुत किया। समणी संचित प्रज्ञा भी संभागी बनी। मंत्री प्रकाश लोढ़ा, तेयुप मंत्री ललित सेठिया, ट्रस्ट अध्यक्ष बहादुर सिंह सेठिया, महासभा उपाध्यक्ष कन्हैयालाल गिडिया आदि उपस्थित थे।
Published on:
28 Aug 2018, 11:26 PM IST
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