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बेंगलूरु.नई दिल्ली।कावेरी जल बंटवारा विवाद में मंगलवार को भी कर्नाटक को उच्चतम न्यायालय से राहत नहीं मिल पाई। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक विधानमंडल में कावेरी बांधों में संग्रहित पानी का उपयोग सिर्फ राज्य में पेयजल के लिए करने के संबंध में पारित प्रस्ताव को दरकिनार करते हुए कर्नाटक को तत्काल तमिलनाडु के लिए पानी छोडऩे को कहा।
जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस उदय यू ललित की पीठ ने कावेरी मसले पर दोनों राज्यों की ओर से दायर 7 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि 28 से 30 सितम्बर तक कर्नाटक तमिलनाडु को रोजाना 6 हजार क्यूसेक पानी दे। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि तमिलनाडु को दिए जाने वाली इस पानी को अंतर राज्यीय विवाद में निपटारे के समय कुल हिस्सेदारी में समायोजित किया जाएगा।
पीठ ने आदेश में कहा कि वो दोनों पक्षों की ओर से याचिका में किए गए दावों का उल्लेख नहीं करना चाहते हैं लेकिन पीठ ने कर्नाटक के वकील फाली एस नरीमन से साफ तौर पर कहा कि वे आदेश का पालन सुनिश्चित कराएं।
अदालत ने कर्नाटक की ओर से 20 सितम्बर की ओर जारी आदेश में सुधार की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान ये आदेश दिए। कर्नाटक ने इस याचिका में यह कहते हुए अदालत के आदेश का पालन करने में असमर्थता जताई थी कि उसके यहां जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं है। कर्नाटक ने दिसम्बर से पहले तमिलनाडु को पानी देने में असमर्थता जताई थी। सोमवार को ही दायर याचिका में तमिलनाडु ने अदालत से कर्नाटक के पानी छोडऩे तक उसकी याचिका पर सुनवाई नहीं करने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने विधानमंडल में पारित प्रस्ताव को अवमानना के तौर पर नहीं लिया लेकिन सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि संघीय व्यवस्था में राज्य अदालत के निर्देशों की अवहेलना नहीं कर सकते हैं।
आपसी सहमति से तलाशें हल
अदालत ने इसके साथ ही केंद्र सरकार को मामले का आपसी सहमति से सर्वमान्य हल तलाशने के लिए दोनों राज्यों के कार्यकारी प्रमुखों (मुख्यमंत्रियों) की बैठक दो दिन में बुलाने के निर्देश भी दिए। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल मुकुल रहतोगी ने अदालत को आश्वस्त किया कि अगली सुनवाई से पहले केंद्र दोनों राज्यों की बैठक बुलाकर हल तलाशने की कोशिश करेगा।
किसानों ने किया रास्ता जाम
अदालत के ताजा आदेश के बाद कावेरी बेसिन क्षेत्र में किसान एक बार फिर सड़क पर उतर आए। मण्ड्या में किसानों ने बेंगलूरु-मैसूरु उच्च पथ को जाम कर दिया।
सदन नेताओं व मंत्रिमंडल की बैठक आज
कोर्ट के ताजा आदेश के बाद राज्य में एक बार फिर से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सरकार ने हालात पर चर्चा के लिए बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है। सचिवालय सूत्रों के मुताबिक बैठक दोपहर तीन बजे विधानसौधा में होगी। इससे पहले सुबह 9.30 बजे विधानमंडल में सभी दलों के सदन नेताओं और कावेरी बेसिन क्षेत्र के विधायकों और जिला प्रभारी मंत्रियों की बैठक मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या की अध्यक्षता में होगी। उधर, ऊर्जा मंत्री डी के शिवकुमार ने मंगलवार को संववाददाताओं से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार इस मसले पर विधानमंडल में पारित प्रस्ताव का पालन करेगी। गौरतलब है कि 21 सितम्बर को सर्वदलीय बैठक के बाद हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने तीन दिन पानी छोडऩे के फैसले का क्रियान्वयन टालने और विधानमंडल अधिवेशन बुलाने का निर्णय किया था।
तुरंत पानी नहीं दे सकते
&मुझे नहीं पता अदालत ने क्या आदेश दिए है। अभी आदेश की प्रति नहीं मिली है, मुझे राज्य के वकील से बात करनी होगी। राष्ट्रीय जल नीति के मुताबिक पेयजल को पहली वरीयता है। इसलिए जब वे पानी छोडऩे को कहते हैं तो वह तुरंत आदेश या कानून नहीं बन जाता।
सिद्धरामय्या, मुख्यमंत्री, (बाढ़ प्रभावित बीदर जिले के हवाई सर्वे के बाद बोले)
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