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नहीं रहें नित्योत्सव कविता के रचयेता निसार अहमद

प्राकृतिक सुंदरता का भावस्पर्शी वर्णन करने वाले कवि प्रोफेसर निसार अहमद का रविवार को आवास पर निधन हो गया।

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नहीं रहें नित्योत्सव कविता के रचयेता निसार अहमद

नहीं रहें नित्योत्सव कविता के रचयेता निसार अहमद

बेंगलूरु.कर्नाटक की प्राकृतिक सुंदरता का भावस्पर्शी वर्णन करने वाले 'नित्योत्सवा ताई नित्योत्सवा गीतÓ की रचयेता कवि प्रोफेसर निसार अहमद (84)का रविवार को दोपहर उनके पद्मनाभनगर में स्थित आवास पर निधन हो गया।इस अनूठे गीत के रचना के कारण उनको नित्योत्सव कवि के नाम से पहचान मिली थी।

5 फरवरी 1936 को बेंगलूरु ग्रामीण जिले के तहसील मुख्यालय देवनहल्ली में जन्म उनका हुआ था।वर्ष 1981 में राज्योत्सव तथा वर्ष 2008 में पद्मश्री पुरस्कार से पुरस्कृत निसार अहमद ने 21 काव्य संग्रहों के रचना की है। उनकी साहित्य रचनाओं में मनद गांधी, कुरी गल सर कुरीगलू, नवोल्लासा, आकाशक्के सरहद्दू इल्ला, संजे एैदर मले, ना एंब परकिया, गांधी बजार,अनामिक आंग्लरु जैसी रचनाओं को काफी सहारा गया है।

अनामिक आंग्लरु रचना को केंद्रीय साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला है। एएन कृष्णराव. गोरुर राममस्वामी अय्यंगार तथा केंपेगौडा पुरस्कारों से पुरस्कृत निसार अहमद ने गुलबर्गा में माईंस एन्ड जियोलॉजी विभाग में सेवा दी है। बेंगलूरु के सेंट्रल कॉलेज, शिवमोग्गा तथा चित्रदुर्गा कॉलेज में वे व्याख्याता थे।

उनके निधन पर मुख्यमंत्री बीएस यडियूरप्पा, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौडा, कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री सीटी रवि,पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या, एचडी कुमारस्वामी,केपीसीसीआई के अध्यक्ष डीके शिवकुमार, पूर्व अध्यक्ष डॉ जी परमेश्वर, कन्नड़ साहित्य परिषद के अध्यक्ष मनू बलेगार, साहित्यकार डॉ एचएस वेंकटेशमूर्ति.डॉ सिद्धलिंगय्या ने शोक व्यक्त किया है।