
दो कलाकार की तराशी गई प्रतिभा आचार्य महाश्रमण-मुनि अर्हत कुमार
बेंगलूरु. तेरापंथ युवक परिषद हनुमंतनगर की ओर से आचार्य महाश्रमण के दीक्षा दिवस को युवा दिवस के रूप में मुनि अर्हतकुमार आदि ठाणा-3 के सान्निध्य में पार्क वेस्ट स्थित कमलेश धर्मेश कोठारी के यहां आयोजित किया गया। मुनि अर्हतकुमार ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा हर प्राणी संसार रूपी दुर्गम जंगल में भटक रहा है। उसे वहां से सही पथ का दर्शन कराने वाला जीपीएस है दीक्षा। दीक्षा खोने की प्रक्रिया है। हर आदमी पाने की चाहत करता है और जहां खोने की बात आती है तो वह खोना नहीं चाहता है, पर बिना खोए व्यक्ति कुछ प्राप्त नहीं कर सकता है। बीज को वटवृक्ष बनाने के लिए अपना अस्तित्व मिटाना पड़ता है। उसी प्रकार आत्मा को परमात्मा का दिव्य स्वरूप पाने के लिए अहंकार, ममकर, राग, द्वेष सबका अस्तित्व मिटाना पड़ता है। संयम पथ पर वही बढ़ सकता है जिसके भीतर तठस्थ भाव होता है सम भाव होता है। दीक्षा वेश बदलने से नहीं होती दीक्षा का वास्तविकता स्वरूप है भीतर का रूपांतरण।
आचार्य महाश्रमण जिन्होंने अल्प आयु में संयम का मार्ग को स्वीकार कर अपने जीवन को संयम की साधना में पूरी तरह लगा दिया। दो कलाकारों के हाथ से तराशी गई एक प्रतिमा आज भगवान बन गई। श्रमण तो बहुत होते हंै पर महाश्रमण वहीं होता है जिसमें विनय की पराकाष्ठा होती है, जिसके जीवन में संयम की सौरभ है, जिसके चेहरे पर रूज़ुता, मृदुता का साक्षात दर्शन हो। आचार्य महाश्रमण जिनका चिंतन समस्या से समाधान की राह बताया है। ऐसे युगपुरुष का नेतृत्व पना मानव जन्म का सौभाग्य है।
सहयोगी मुनि भारतकुमार ने कहा संयम की सौरभ से सुरबित है जिसका कण कण रवि सम उद्दितोधित है जिसका जीवन वह है महाश्रमण बाल मुनि जयदीपकुमार ने गीतिका का संगान किया। कार्यक्रम की शुरुआत नमस्कार महामंत्र से हुआ, महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण किया गया। युवक परिषद अध्यक्ष धर्मेश कोठारी ने सभी का स्वागत किया। बीजेएस पार्क वेस्ट अध्यक्ष विनय कानूंगा, महिला मंडल मंत्री सरस्वती बाफना ने विचार व्यक्त किए। संयोजक मोहित भंडारी का विशेष श्रम रहा। मंत्री महावीर कटारिया ने संचालन किया।
Published on:
16 May 2022 08:57 am
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