
आचार्य महेन्द्रसागर चामराजपेट पहुंचे
बेंगलूरु. आचार्य महेंद्रसागर सूरी आदि ठाणा चार मंगलवार को त्यागराज नगर से विहार कर चामराजपेट स्थित शीतलनाथ जिनालय पहुंचे। आचार्य की निश्रा में यहां शीतलनाथ जिनालय की तीसरी तीन दिवसीय वर्षगांठ का आयोजन किया जाएगा। संघ ने सामैया कर गुरु भगवंतों का स्वागत किया। मंगलवार को यहां आयोजित प्रवचन में आचार्य महेंद्रसागर सूरी कहा कि धर्म का जैसे अलौकिक अस्तित्व है, वैसे ही उसका फल और प्रभाव भी अलौकिक होता है। यह सब पाने का सौभाग्य सामान्य मनुष्यों के भाग्य में नहीं होता है। इसलिए आदमी धर्मी हो और उस पर आपत्ति आए तब वह अंदर से हिल जाता है। क्या धर्मी के ऊपर ही आपत्ति आती है और अधर्मी को कुछ भी तकलीफ नहीं। हकीकत में यह मान्यता भी गलत है। सच्चा धर्मी तो यह सोचता है कि मेरे कर्मों का कर्जा चुकाया जा रहा है। अधर्मी का सुख देखकर सभी को ऐसा लगता है कि यह इतना सुखी है। परंतु वह सुखी दिख रहा है। अधर्मी ऐसी मानसिक चिंता संताप आदि से ऐसा तो घिरा हुआ होता है कि सुख का वह सरोवर भी सतत जल रहे उसके हृदय को शांत नहीं कर पाता है। इस अवसर पर मुनि राजपद्मसागर, मुनि मेरु पद््रमसागर व मुनि अर्हमपद्मसागर भी उपस्थित थे।
भजन संध्या का आयोजन
मैसूरु. एक शाम बीसोत माता के नाम भजन संध्या का आयोजन कबीर मार्ग स्थित कंटीमल्लय्या चौल्ट्री में किया गया। भजन गायक किशोर सिंह, उम्मेद सिंह व चंद्रप्रकाश सीरवी ने राजस्थानी लोक भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों का दौरा देर रात तक जारी रहा। इस अवसर पर राजपुरोहित समाज मैसूरु के अध्यक्ष हापू सिंह,अनोप सिंह, रेंवत सिंह, महेन्द्रसिंह राजपुरोहित, राजेन्द्र सिंह, लूण सिंह, मुल्तान सिंह, अशोक सिंह, हीर सिंह, गुलाब सिंह, मोती सिंह मौजूद रहे।
Published on:
08 Dec 2021 07:17 am
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