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अग्रसेन बैंक की बैठक सम्पन्न

निदेशक कमल अग्रवाल ने पिछली बैठक का ब्यौरा पढ़कर सुनाया

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अग्रसेन बैंक की बैठक सम्पन्न

बेंगलूरु. अग्रसेन सौहार्द क्रेडिट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की दूसरी सर्वसाधारण सभा सोमवार को अग्रसेन अस्पताल सभागार में हुई। स्वागत चेयरमैन सतीश जैन ने किया। उन्होंने बैंक की गतिविधियों की जानकारी दी। निदेशक कमल अग्रवाल ने पिछली बैठक का ब्यौरा पढ़कर सुनाया। सचिव चंद्रिका ने 2017-18 की बैलेंसशीट रखी, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। वर्ष 2018-19 के लिए बेनूर नागराज को लेखा परीक्षक नियुक्त किया गया। जैन ने 2018-19 के संभावित आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया। धन्यवाद निदेशक पूजा गुरु प्रसाद ने दिया।

जिनशासन का मूल है विनय
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, हनुमंतनगर के तत्वाावधान में सोमवार को साध्वी सुमित्रा के सान्निध्य में आचार्य डॉ शिवमुनि की 77वीं जयंती के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान की शृृंखला में विनय दिवस पर साध्वी सुप्रिया ने कहा कि विनय जिनशासन का मूल है।

उन्होंने कहा कि जब हम किसी की वंदना करते हैं तब हमारे वंदना करने से नीच गोत्र का क्षय होता है और जीव को उच्च गोत्र की प्राप्ति होती है। मन, वचन, काया योगों की स्थिरता सहित शुद्ध भावों से की गई वंदना से हमें सुख, समृद्धि, सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साध्वी ने वंदना व नमस्कार के महत्व के साथ शिष्टाचार की संस्कृति पर विस्तार से विवेचना की। साध्वी सुविधि ने भजन प्रस्तुत किया। विनय दिवस पर श्रद्धालुओं ने शिवाचार्य जयंती प्रसंग पर विधिवत छत्तीस बार सविधि तिक्खुतों के पाठ से वंदना की। संचालन संजय कुमार कचोलिया ने किया।

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तप-त्याग की साधना कराता है भारत का तीर्थ
बेंगलूरु. आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, जयगनर में आचार्य कुमुदनंदी ने कहा कि दशलक्षण सांसारिक नहीं पारभार्मिक है। लौकिक नहीं, लोकोत्तर धर्म है। उन्होंने कहा कि ये हमें बहिर्मुखता से हटाकर अंतर्मुखी बनाते हैं। स्वयं के लिए सोचने पर मजबूर करते हैं। ये खाने-पीने के नहीं, त्याग-तपस्या के धर्म हैं। इन दिनों जो तप व त्यागमय जीवन जी रहे हैं वह श्रावक होते हुए भी संतत्व की अनुभूति कर लेते हैं, क्योंकि संतों का जीवन त्याग और तपस्या का जीवन होता है। ये धर्म शरीर की सुख-सुविधा को छुड़ाकर आत्मोन्मुख हैं।

इसलिए इन धर्मों को लोकोत्तर धर्म कहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का तीर्थ किसी न किसी माध्यम से तप व त्याग की साधना कराता है। हिंदू यदि नवरात्रि में उपवास कर तपस्या करते हैं तो मुस्लिम रमजान में रोजा रखकर अपनी मान्यतानुसार त्याग करते हैं। जैनों का यह पर्व भी श्रावक व साधु को सिर्फ तपाता ही है। इस दशलक्षण पर्व का दूसरा नाम पर्युषण भी है।