
आनंद ऋषि ने युग के अद्वितीय महान संत थे-साध्वी सुमित्रा
बेंगलूरु. राजाजीनगर स्थानक में विराजित साध्वी सुमित्रा के सान्निध्य में आचार्य आनंदऋषि का स्मरण करते हुए 121 वां जन्मोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर साध्वी सुप्रिया ने कहा कि श्रमण संघ के द्वितीय पट्टधर आचार्य आनंद ऋषि ने युग के अद्वितीय महान संत थे। वे जैन ही नहीं जन जन के संत थे। आचार्य का सम्पूर्ण जीवन अलौकिक गुणों का संगम स्थल था। आपकी उच्चतर साधना, भव्य व्यक्तित्व एवं आकर्षक सौजन्य आपके चारुचरित्र के ध्योतक है। गुरु आनंद ने केवल जैन दर्शन ही नहीं अपितु भारतीय दर्शन का अध्ययन किया था। विनय, सरलता, गुरु भक्ति और समभाव की साधना उनके जीवन की महान अंतरंग साधना थी। आचार्य आनंद 18 भाषाओं के ज्ञाता थे। उन्होंने जीवन के 80 वें वर्ष में भी पारसी भाषा का अध्ययन किया। आचार्य आनंद श्रमण संघ के शिरोमणि थे सरताज थे। साध्वी सुविधि ने गुरु गुणगान में स्तवन की प्रस्तुति दी। साध्वी सुमित्रा ने मंगलपाठ प्रदान किया। इस अवसर पर हरियाणा के अंबाला संघ के अध्यक्ष रोहित जैन,नीरज जैन, प्रदीप जैन, कोयंबत्तूर संघ से इंद्रचंद कोठारी, विजयनगर संघ के अध्यक्ष पुखराज मेहता व अन्य उपस्थित हुए। महावीरचंद धोका ने गुरु गुणगान में अपने विचार व्यक्त किए। आनंद जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में अनेक भाई बहनों ने तेले तप, आयंबिल एवं एकासन के प्रत्याख्यान लिए। संचालन संघ के किशोर दलाल ने किया।
Published on:
10 Aug 2021 07:57 am

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