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बचपन में ही सावधान हो जाएं

हरी लाइट संदेश देती है कि जवानी में अच्छे कार्य करने हैं वो जल्दी कर लेवें और अंतिम लाल लाइट बुढ़ापे का संकेत करती है

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बचपन में ही सावधान हो जाएं

बेंगलूरु. हनुमंतनगर जैन स्थानक में साध्वी सुप्रिया ने कहा कि प्रभु महावीर ने उत्तराध्ययन सूत्र में मनुष्यत्व, जिनवाणी श्रवण, श्रद्धा भावना और संयम में पुरुषार्थ-पराक्रम इन चार परम दुर्लभ अंग बतलाए हैं। साध्वी ने 'हमारा जीवन कैसे सुधरेंÓ विषय पर कहा कि बचपन, जवानी और बुढ़ापा ये तीन जीवन की अवस्थाएं हैं।

उन्होंने इन तीन अवस्थाओं को सड़क पर लगे ट्रैफिक सिग्नल पर लगे तीन प्रकार की लाइट के माध्यम से समझाते हुए कहा कि सर्वप्रथम पीली लाइट हमे संकेत करती है कि बचपन में सावधान हो जाएं। हरी लाइट संदेश देती है कि जवानी में अच्छे कार्य करने हैं वो जल्दी कर लेवें और अंतिम लाल लाइट बुढ़ापे का संकेत करती है। बुढ़ापे में शरीर की शक्ति कमजोर हो जाती है। शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियां डेरा डाल लेती हैं। साध्वी सुविधि ने भजन प्रस्तुत किया। सभा में कर्नाटक जैन कांफ्रेंस के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेशचंद छल्लाणी भी उपस्थित थे। स्वागत अध्यक्ष हुक्मीचंद कांकरिया ने किया। संचालन उपाध्यक्ष अशोक कुमार गादिया ने किया।

अध्यात्म जागरण में होता है मंत्रों का योग
तेरापंथ भवन यशवंतपुर में मुनि रणजीत कुमार ने कहा कि मंत्र साधना से साधक अपने ऊर्जा वलय को सक्षम बना सकता है। विशिष्ट साधना से पवित्रता का सबसे अधिक मूल्य होता है। उन्होंने कहा कि मंत्र साधना में साधक को सबसे पहले अपने ईष्ट को बलवान बनाना होता है। उसके पश्चात ही सुरक्षा कवच का निर्माण किया जाता है, जिससे साधना में आने वाली विध्न बाधाएं दूर हो सकती हैं।

मुनि रमेश कुमार ने कहा कि अध्यात्म के जागरण में मंत्रों का बहुत योग होता है। मंत्र एक शक्ति है, एक ऊर्जा है। मंत्र शक्ति का अच्छा या गलत प्रयोग करना प्रयोक्ता पर निर्भर करता है। मुनिद्वय के सान्निध्य में रविवार को तेयुप बेंगलूरु, टीदासरहल्ली के तत्वावधान में सुबह 9.30 बजे मेवाड़ भवन यशवंतपुर में मंत्र दीक्षा व नमस्कार महामंत्र साधना प्रयोग सप्ताह का आयोजन होगा।


आध्यात्मिक जीवन की नींव है व्रत
वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक राजाजीनगर में साध्वी संयमलता ने श्रावक शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि जिसमें श्रद्धा, विवेक और करुणा होती है, वही सच्चा श्रावक होता है। उन्होंने कहा कि श्रावक के लिए नियम प्रत्याख्यान एक पाल है, एक बांध है जो स्वच्छंद बहते हुए जीवन प्रवाह को मर्यादित बना देता है। व्रत एक प्रकार से आध्यात्मिक जीवन की नींव है।

साध्वी अमितप्रज्ञा ने कहा कि चाहे सुख हो या दु:ख हो, अनुकूलता हो या प्रतिकूलता हो, हर परिस्थिति में मुस्कुराना ही जिंदगी है। कंचन बोहरा के उपवास के उपलक्ष में रमेश बोहरा परिवार ने प्रभावना की। साध्वी कमलप्रज्ञा, साध्वी सौरभप्रज्ञा भी उपस्थित थीं। सभा में कामारेड्डी युवा संघ एवं बेंगलूरु के अनेक उपनगरों से श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ लिया।