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जमखंडी में काम न आई भाजपा की रणनीति

भाजपा को विश्वास था कि श्रीकांत कुलकर्णी भाजपा विधायकों की संख्या 105 तक पहुंचा देंगे
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 9 Nov 2018, 4:49 PM IST

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जमखंडी में काम न आई भाजपा की रणनीति

बेंगलूरु. बागलकोट जिले के जमखंडी विधानसभा क्षेत्र में जीत दर्ज करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जो सोची-समझी रणनीति तैयार की, वह काम नहीं आई।

भाजपा को विश्वास था कि पिछले चुनाव में मामूली वोटों से शिकस्त खाने वाले श्रीकांत कुलकर्णी यहां से जीत दर्ज कर 224 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 105 तक पहुंचा देंगे।

रामनगर में भाजपा प्रत्याशी के पीछे हटने से वहां तो कोई संभावना थी ही नहीं। दरअसल, इस विधानसभा क्षेत्र को हर हाल में जीतने के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीएस येड्डियूरप्पा स्वंय काफी रुचि ले रहे थे।

मई 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार सिद्दू न्यामगौड़ा ने भाजपा के श्रीकांत कुलकर्णी को 2795 मतों से हराया था।

लेकिन, सड़क दुर्घटना में सिद्दू न्यामगौड़ा के मारे जाने के बाद कांग्रेस ने उनके बेटे आनंद सिद्दू न्यामगौड़ा को यहां से उम्मीदवार बनाया।

येड्डियूरप्पा ने आनंद को मिलने वाले सहानुभूति वोट की काट के लिए लिंगायत मतों को एकजुट करने की रणनीति अपनाई।

श्रीकांत कुलकर्णी ब्राह्मण हैं और पिछले चुनावों में उनकी मामूली वोटों से हार की वजह संगमेश निराणी का चुनाव लडऩा माना गया।

संगमेश निराणी भाजपा के पूर्व मंत्री मुरुगेश निराणी के भाई हैं और पंचमाशी लिंगायत भी हैं। पिछले विधान सभा चुनावों में जब भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने बगावत कर दी और स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े।

स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर भी संगमेश ने अच्छी सफलता हासिल की। जहां चुनाव जीतने वाले सिद्दू न्यामगौड़ा को 49 हजार 245 मत मिले वहीं भाजपा के श्रीकांत कुलकर्णी को 46 हजार 450 और तीसरे स्थान पर रहे संगमेश को 24 हजार 46 1 मिले।

हालांकि, संगमेश को पार्टी से निकाल दिया गया था लेकिन, येड्डियूरप्पा ने उनका निष्कासन रद्द कर उपचुनावों से पहले उन्हें भाजपा में शामिल कर लिया था। येड्डियूरप्पा को उम्मीद थी कि अगर संगमेश को मिले मत भी भाजपा के पक्ष में आ गए तो वहां कमल खिल जाएगा।

अगर पिछले विधानसभा चुनावों में श्रीकांत कुलकर्णी और संगमेश निराणी के मतों को जोड़ दें तो यह लगभग 71 हजार मत होता है जो श्रीकांत कुलकर्णी की जीत के लिए पर्याप्त हो सकता था। भाजपा की रणनीति कामयाब नहीं हुई।

जहां श्रीकांत कुलकर्णी को इस बार 57 हजार 537 मत मिले वहीं आनंद न्यामगौड़ा को 97 हजार 17 मत प्राप्त हुए। जाहिर है भाजपा की रणनीति काम नहीं आई और मतदाताओं ने आनंद न्यामगौड़ा को ही पहली पसंद के रूप में स्वीकार किया।

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