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चांद से नमूने लेकर आएगा चंद्रयान-4, मिशन के लिए मजबूत आधार तैयार

चांद की कक्षा से वापस लौटा प्रोपल्शन मॉड्यूल अगले एक साल से अधिक समय तक लगाता रहेगा फेराप्रोपल्शन मॉड्यूल में अब ईंधन नहीं पर, शेप पे-लोड से मिलते रहेंगे आंकड़े

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चांद से नमूने लेकर आएगा चंद्रयान-4, मिशन के लिए मजबूत आधार तैयार

चांद से नमूने लेकर आएगा चंद्रयान-4, मिशन के लिए मजबूत आधार तैयार

बेंगलूरु.
चंद्रयान-3 मिशन में कई प्रयोगों को अंजाम देकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-4 मिशन का एक मजबूत आधार रख दिया है। इसरो के उच्च पदस्थ अधिकारियों के मुताबिक चंद्रयान-4 सैंपल रिटर्न मिशन होगा। यह मिशन चांद से नमूने लेकर वापस धरती पर आएगा। अभी चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी नहीं मिली है लेकिन, इसके लिए आवश्यक तकनीक के विकास पर काम शुरू हो चुका है।

इसरो वैज्ञानिकों के मुताबिक सैंपल रिटर्न मिशन की राह में कई चुनौतियां होंगी। चंद्रमा पर लैंडर मॉड्यूल (एलएम) को उतारने के बाद वहां से नमूने लेकर एक आरोहक माड्यूल (एसेंडर मॉड्यूल) उड़ान भरेगा और चंद्रमा की कक्षा में पहुंचेगा। चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद वह ट्रांसफर मॉड्यूल (टीएम) से जुड़ेगा (डॉकिंग) और फिर रिवर्स मैनुवर के जरिए उसे चांद की कक्षा से धरती की कक्षा में लाया जाएगा। अंतत: उसे धरती पर उतार लिया जाएगा। डॉकिंग तकनीक हासिल करने के लिए इसरो स्पेडएक्स मिशन लांच करने की तैयारी कर रहा है। स्पेडएक्स मिशन में दो उपग्रहों को एक साथ अंतरिक्ष में लांच किया जाएगा। दोनों उपग्रह धरती की कक्षा में पहुंचने के बाद पहले एक-दूसरे से अलग होंगे फिर दोनों आपस में जुड़ेंगे। डॉकिंग तकनीक न सिर्फ सैंपल रिटर्न मिशन बल्कि भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाने के दृष्टिकोण से भी काफी अहम है।

एक मिशन में कई परीक्षण
इसरो वैज्ञानिकों का कहना है कि, चंद्रयान-3 मिशन उम्मीदों से भी अधिक सफल रहा। तमाम उद्देश्यों को हासिल करने के बाद चंद्रयान-4 मिशन के लिए कई परीक्षण भी कर लिए गए। चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की महत्वपूर्ण तकनीक हासिल करने के अलावा इसी मिशन में हमने हॉप टेस्ट भी कर लिया। हॉप टेस्ट चंद्रमा की सतह से उड़ान भरने के लिए आवश्यक थ्रस्ट और तकनीक का एक अहम परीक्षण था। अब प्रोपल्शन मॉड्यूल को चंद्रमा की कक्षा से रिवर्स नेविगेशन के जरिए वापस धरती की कक्षा में लाकर यह भी साबित कर दिया कि, हम न सिर्फ चांद तक पहुंच सकते हैं बल्कि वहां से वापस भी आ सकते हैं।

चंद्रयान-3 उम्मीदों से अधिक सफल
इसरो अधिकारी ने कहा कि, चंद्रयान-3 मिशन का उद्देश्य केवल चांद की धरती पर सॉफ्ट लैंडिंग था। यह सब मिशन के उद्देश्यों में शामिल नहीं था। लेकिन, यह उम्मीदों से भी अधिक सफल रहा जिससे भविष्य के चंद्र मिशनों को ध्यान में रखकर हम कई प्रयोग कर पाए।

13 दिनों में धरती का एक फेरा
इस बीच चांद की कक्षा से वापस लौटा चंद्रयान-3 का प्रोपल्शन मॉड्यूल अगले एक साल तक धरती की कक्षा में चक्कर लगाता रहेगा। इसरो वैज्ञानिक ने बताया कि, अब प्रोपल्शन मॉड्यूल में ईंधन नहीं बचा है। लेकिन, वह अपनी कक्षा में चक्कर लगाता रहेगा। इस दौरान प्रोपल्शन मॉड्यूल के एक मात्र पे-लोड स्पेक्ट्रो-पोलरिमेट्री हैबिटेल प्लानेट अर्थ (शेप) का समय-समय पर परिचालन होता रहेगा। जब भी इसका रुख धरती की ओर होगा यह आंकड़े जुटाता रहेगा। फिलहाल यह धरती की एक परिक्रमा 13 दिनों में पूरी कर रहा है। धरती से इसकी निकटतम दूरी लगभग 1.5 लाख जबकि, अधिकतम दूरी 3.05 लाख होगी।