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औद्योगिक न्यायाधिकरण का प्रमुख पद पांच महीने से रिक्त

580 मामले लंबित,पीठासीन अधिकारी के अभाव में नहीं हो रही सुनवाई

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बेंगलूरु. राज्य स्थित एक मात्र केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (सीजीआईटी) सह श्रम न्यायालय में पिछले पांच महीनों के दौरान एक भी मामले की सुनवाई नहीं हुई है। वहीं केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष ही सीजीआईटी में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से संबंधित सभी मामलों की सुनवाई की अनुमति दी है लेकिन सुनवाई नहीं होने से नियोक्ता और कर्मचारियों दोनों को न्याय मिलने में देरी हो रही है।

श्हर के गोरगुंटेपाल्या स्थित श्रम आयोग कार्यालय में सीजीआईटी सह श्रम न्यायालय है जहां पिछले वर्ष 31 अक्टूबर 2017 तक न्यायाधीश वीएस रवि मामलों की सुनवाई कर रहे थे। हालंाकि 31 अक्टूबर को तत्काल प्रभाव से न्यायाधीश रवि का तबादला मुम्बई के सैन्य न्यायाधिकरण में कर दिया।

इस प्रकार 1 नवम्बर के बाद अब तक स्थायी रूप से किसी पीठासीन अधिकारी को सीजीआईटी सह श्रम न्यायालय का प्रभार नहीं दिया गया है बल्कि हैदराबाद न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी को बेंगलूरु का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। मूलत: इसी कारण से पिछले पांच महीनों से यहां एक भी मामले की सुनवाई नहीं हुई है जबकि श्रमिकों के विवादों से संबंधित नियोक्ता और कर्मचारियों के कई मामले अक्सर आते रहते हैं।

40 मामले अभी अधिसूचित भी नहीं
सीजीआईटी में मौजूदा समय में 580 मामलों की सुनवाई लंबित है जबकि ४० अन्य मामलों को सुनवाई के लिए अधिसूचित होने का इंतजार है। इस बीच भारतीय कानून प्रैक्टिशनर्स फोरम ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की है जिसमें सीजीआईटी में एक पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति की अपील की गई है। याचिका पर उच्च न्यायालय में सुनवाई अगले सप्ताह होगी। औद्योगिक प्रतिष्ठान अधिनियम जैसे एयरलाइन, और खान और एचएमटी, भेल, बीईएमएल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों से संबंधित मामले की सुनवाई यहां होती है। यह कर्मचारियों के सेवाओं की बर्खास्तगी या समाप्ति से जुड़े मामलों और विभिन्न संगठनों के यूनियनों द्वारा दायर मामलों की सुनवाई का भी एक मंच है।

रिक्ति भरने की लम्बी प्रक्रिया
केन्द्र सरकार ने 26 मई 2017 को जारी एक अधिसूचन में निर्देश दिया कि ईपीएफ से संबंधित सभी मामलों को देश के 22 स्थानों पर स्थित सीजीआईटी सह-श्रम अदालतों में सुना जाएगा। राज्यों से संबधित पीएफ मामलों को स्थानीय स्तर पर सीजीआईटी में स्थानांतरित करने के निर्देश से दोनों पक्षों को बड़ी राहत मिली क्योंकि पहले उन्हें इसके लिए नई दिल्ली जाना पड़ता था। इस बीच राज्य श्रम आयोग के कार्यालय के अनुसार रिक्त पद को भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके लिए विज्ञापन जारी किया गया है लेकिन रिक्ति भरने की एंक लंबी प्रक्रिया है जिसमें कई महीने लग सकते हैं। वहीं श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 1 जून 2017 को सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को एक अधिसूचना जारी कर दी थी, जिसमें रिक्त पदों को भरने के लिए कहा गया था।