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केएसपीसीबी के अध्यक्ष के नियुक्ति आवेदन विज्ञापन को लेकर विवाद

उन्होंने कहा, मानव स्वास्थ्य के लिए मौजूदा खतरों को देखते हुए सरकार के पास अब भी सही निर्णय लेने का मौका है। सरकारी संस्थानों द्वारा किए गए अध्ययनों में सब्जियों में भारी धातुएं, भूजल में यूरेनियम पाया गया है। वायु और जल प्रदूषण पर रिपोर्टों की कोई कमी नहीं है।

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-कार्यकर्ताओं ने शैक्षणिक योग्यता को लेकर उठाए सवाल

मान्यता प्राप्त संस्थान से इंजीनियरिंग की डिग्री या विज्ञान स्ट्रीम Engineering degree or Science stream में स्नातकोत्तर डिग्री वाले व्यक्ति भी कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड Karnataka State Pollution Control Board (केएसपीसीबी) के अध्यक्ष पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। अध्यक्ष पद के लिए आवेदन मांगने वाले वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विभाग के नए विज्ञापन ने ढीली शैक्षणिक आवश्यकताओं को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच चिंता पैदा कर दी है। उनके अनुसार अध्यक्ष के पद को कमतर करने के लिए इससे अधिक कुछ नहीं किया जा सकता है।कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री वाले लोग भी इस पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह केएसपीसीबी अध्यक्ष की योग्यता के मुद्दे को संबोधित करने में उच्च न्यायालय के समक्ष सरकार की प्रतिबद्धता के खिलाफ है।

नवीनतम विज्ञापन राज्य सरकार Karnataka Government के 19 जून, 2020 के दिशा-निर्देशों के भी विरुद्ध है, जिसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति तब तक अध्यक्ष के रूप में नामांकन के लिए पात्र नहीं माना जाएगा, जब तक कि उसके पास पर्यावरण विज्ञान में मास्टर डिग्री या पर्यावरण इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री या किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से संबद्ध विज्ञान में समकक्ष डिग्री न हो और उसे पर्यावरण संरक्षण से संबंधित क्षेत्रों में ज्ञान और अनुभव न हो।कार्यकर्ता अंजनेया रेड्डी ने कहा कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में योग्य लोगों की नियुक्ति की जाए।

उन्होंने कहा, मानव स्वास्थ्य के लिए मौजूदा खतरों को देखते हुए सरकार के पास अब भी सही निर्णय लेने का मौका है। सरकारी संस्थानों द्वारा किए गए अध्ययनों में सब्जियों में भारी धातुएं, भूजल में यूरेनियम पाया गया है। वायु और जल प्रदूषण पर रिपोर्टों की कोई कमी नहीं है। इन सभी बातों को देखते हुए केएसपीसीबी के अध्यक्ष पद को कई खतरों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण पद बनाना चाहिए। अगर सरकार इसे स्वीकार करने में विफल रहती है, तो हम फिर से लड़ेंगे।