बैंगलोर

हरिहर शहर में तुंगभद्रा पुल संकट में … खस्ताहाल हालत, गिर रही है परत

हरिहर शहर में तुंगभद्रा पुल के बिना रखरखाव के समय से पहले ढह जाने का डर सता रहा है। यह पुल 1886 में मैसूर महाराजाओं के शासनकाल के दौरान बनाया गया था।

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Sep 26, 2022
हरिहर शहर में तुंगभद्रा पुल संकट में ... खस्ताहाल हालत, गिर रही है परत

दोवणगेरे. हरिहर शहर में तुंगभद्रा पुल के बिना रखरखाव के समय से पहले ढह जाने का डर सता रहा है। यह पुल 1886 में मैसूर महाराजाओं के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। लगभग एक सदी तक, यह पुल तत्कालीन बॉम्बे-मैसूर राज्य और फिर उत्तर-दक्षिण कर्नाटक के बीच यातायात की कड़ी बना हुआ था। यातायात के योग्य नहीं होने के कारण 30 साल पूर्व भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। नए पुल के बनने के बाद इसके बगल में बने नए पुल पर दो साल से भारी वाहनों का आवागमन चल रहा है।
अभी भी उपयोगी
इस पुल पर शहर को पानी की आपूर्ति करने वाली दो बड़ी पाइपलाइन हैं। एक पाइप लाइन 30 साल पहले बिछाई गई थी, जबकि दूसरी जलसिरी पाइप दो साल पहले बिछाई गई थी। बगल के नए पुल पर भारी वाहनों के दबाव के कारण पुराने पुल पर अभी भी हल्के वाहनों का आवागमन बना हुआ है।
अनुदान मिलने पर पूर्व में एकाध बार पुल पर से जहां तक हाथ पहुंच सकता था वहां तक के पौधे और झाडिय़ों को काटा गया परन्तु पारा डालकर जड़ समेत हटाने की कोशिश नहीं की। पूर्व में पुल के दोनों किनारे पर लकड़ी से झूले की मदद से जड़ समेत पौधों, झाडिय़ों को हटाने का कार्य किया जाता था।
पानी के लिए हाहाकार मच जाएगा
कुछ वर्षों से पौधे-झाडिय़ां लंबे हो गए हैं। एक फुट तक की परिधि के पेड़ हैं। ये धीरे-धीरे पुल की ऊपरी परत को झड़ा रहे हैं। पुल के भीतरी फ्रेम की ईंटें और पत्थर दिखाई दे रहे हैं। हालात ऐसे हैं, दुर्भाग्य से यदि पुल के गिरने पर या आंशिक रूप से गिरने पर एक शहर के लोगों के साथ भावनात्मक संबंध रखने वाला एक शताब्दी पुराना स्मारक लुप्त हो जाएगा। इसके अलावा शहर के एक लाख लोगों को पीने के पानी के लिए हाहाकार मच जाएगा।
समान विचारधारा वालों का मंच के प्रतिनिधि जे कलीमबाशा ने बताया कि जलसिरी पानी की पाइपलाइन स्थापित करने के लिए इस पुल को 1886 के बजाय 1964 में बनाया गया है कहकर दावणगेरे निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के सिविल विभाग के विशेषज्ञ ने गलत जानकारी दी थी। अगर करोड़ों की योजना होने पर लोकनिर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारी काम करने में रुचि लेते हैं। पांच-छह लाख रुपए अनुदान के पुल रखरखाव की योजना में रुचि नहीं होने से पुल लुप्त होने के कगार पर पहुंचा है।
अनुदान मिलने पर शुरू करेंगे कार्य
पुल के रख-रखाव के लिए लाखों रुपए अनुदान के लिए विभाग को प्रस्ताव सौंपा गया है। अनुदान आने पर हम काम शुरू कर देंगे।
- शिवमूर्तप्पा, एईई, पीडब्ल्यूडी

Published on:
26 Sept 2022 07:24 pm
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