11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

15 साल से पुराने स्कूल बसों के नियमों में ढील की मांग

केरल और तमिलनाडु में 15 साल से अधिक पुरानी स्कूल बसों को भी चलाने की अनुमति है। नए स्कूल बसों के लिए तीन साल में एक बार और पुरानी बसों के लिए हर साल फिटनेस प्रमाणपत्र नवीनीकरण का प्रावधान है।

less than 1 minute read
Google source verification
स्कूलों को हर साल बसों की फिटनेस नवीनीकरण कराना पड़ता है, जबकि बसें रोज 100 किलोमीटर से भी कम चलती हैं और अच्छी स्थिति में रहती हैं।

file photo

कर्नाटक के अनुदानित और गैर-अनुदानित निजी स्कूलों ने परिवहन विभाग से 15 साल से पुरानी स्कूल बसों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर चलाने की अनुमति देने की मांग की है।

कर्नाटक निजी शिक्षण संस्थान संघ Karnataka Private Educational Institutions Association के अध्यक्ष लोकेश टी. ने कहा कि निजी स्कूलों Private Schools को हर साल बसों की फिटनेस नवीनीकरण कराना पड़ता है, जबकि बसें रोज 100 किलोमीटर से भी कम चलती हैं और अच्छी स्थिति में रहती हैं।

हर 15 साल में बस बदलना आर्थिक रूप से नुकसानदेह

उन्होंने बताया कि राज्य में 6,000 से अधिक गैर-अनुदानित निजी स्कूल हैं और बिना सरकारी अनुदान के हर 15 साल में बस बदलना आर्थिक रूप से नुकसानदेह है। इसी बीच, अनुदानित निजी स्कूलों के संगठन ने भी परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी को पत्र लिखकर नियमों में ढील देने की मांग की है।

परिवहन मंत्री को पत्र

एसोसिएटेड मैनेजमेंट्स ऑफ प्राइमरी एंड सेकेंडरी स्कूल्स इन कर्नाटक Associated Managements of Primary and Secondary Schools in Karnataka के महासचिव डी. शशिकुमार ने बताया कि केरल और तमिलनाडु में 15 साल से अधिक पुरानी स्कूल बसों को भी चलाने की अनुमति है। नए स्कूल बसों के लिए तीन साल में एक बार और पुरानी बसों के लिए हर साल फिटनेस प्रमाणपत्र नवीनीकरण का प्रावधान है। राज्य के 20,000 से अधिक अनुदानित निजी स्कूलों ने भी परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर नियमों में ढील देने की मांग की है।