संघ ने किया तपस्वियों का बहुमान
बेंगलूरु. टी.दासरहल्ली स्थित जैन संघ में विराजित आचार्य महेंद्रसागर सूरी के शिष्य मुनि राज पद्मसागर ने गुरुवार को कल्पसूत्र वांचन में पार्श्वनाथ भगवान का चरित्र, नेमिनाथ भगवान का चरित्र, आदिनाथ भगवान के चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष सम्मेदशिखर पर्वत पर ध्यान मुद्रा में हुआ था। पाश्र्वनाथ भगवान की भक्ति, उपासना करने से यश की प्राप्ति होती है। सभी को पाश्र्वनाथ की भक्ति करनी चाहिए।
मुनि ने कहा कि नेमिनाथ भगवान का मोक्षगमन गिरनाथ पर्वत के शिखर पर मोक्ष गमन हुआ था। वहां से वे मोक्ष को सिधारे थे। नेमिनाथ भगवान बाल ब्रह्मचारी थे। नेमिनाथ भगवान की भक्ति करने से रोग, दोष व शोक, आधि व्याधि, उपाधि, कोरोना जैसे रोग दूर हो जाते हैं। आदिनाथ भगवान का मोक्ष गमन अष्टापद पर्वत पर हुआ था। आदिनाथ भगवान की साधना कर अपने आदि कर्मों को खपाना है। आदि कर्मों का नाश करना है। आदिनाथ भगवान हमारे प्रथम तीर्थंकर हैं।
मुनि राज पद्मसागर ने गुरुवार को स्थविरावली(गुरुओं की परम्परा), भगवान महावीर के नौ गण व ग्यारह गन्धर्व के बारे में जानकारी दी। गुरुवार को टी.दासरहल्ली संघ में चार तपस्वियों, ट्रस्टी गिरिश भाई सहित अनेक तपस्वियों का बहुमान किया गया।