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धर्म की रक्षा होगी तो धर्म करेगा आपकी रक्षा

गोड़वाड़ भवन में उपाध्याय रविंद्र मुनि के सान्निध्य में धर्मसभा

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धर्म की रक्षा होगी तो धर्म करेगा आपकी रक्षा

बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोड़वाड़ भवन में उपाध्याय रविंद्र मुनि के सान्निध्य में रमणीक मुनि ने रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के हिसाब से रक्षाबंधन तथा जैन धर्म में सबसे पवित्रतम पर्व पर्युषण पर्व को
बताया गया है।


उन्होंने रक्षाबंधन को ब्राह्मणों का त्यौहार बताते हुए कहा कि राजा रजवाड़ों के समय धर्म की रक्षा के लिए ब्राह्मण रक्षा सूत्र बांधते थे। धर्म की रक्षा होगी तो धर्म भी तुम्हारी रक्षा करेगा। ब्राह्मण को संत, ज्ञान एवं आत्मा का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि इनमें विशुद्धता होती है। धर्म, कर्तव्य प्रेम को ही कहते हैं। संतों को भी ब्राह्मण कहा गया है। ब्राह्मण सभी के बारे में सोचता है, यह शुद्धतम अवस्था है। ब्राह्मणों से बहन तक पहुंचा यह त्यौहार आज बहन और भाई के रिश्ते के लिए पवित्रतम बन गया है। जब तक इंसान में इंसानियत है तभी तक वह इंसान है। इंसानियत के अभाव में कोई इंसान नहीं होता। मानवता के अभाव में कोई मानव नहीं होता।


चौमुखी जाप के लाभार्थी का सम्मान महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने बताया कि चौमुखी जाप के लाभार्थी उत्तमचंद चंचलबाई कातरेला, मिश्रीलाल मिश्रीबाई कातरेला परिवार का जैन दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया। सभा में रणजीत मल कानूंगा, केसरीमल बुरड़, शांतिलाल लोढा, बाबूलाल रांका, अशोका धोका, कल्याण सिंह बुरड़, शांतिलाल भंडारी, जसवंत गन्ना सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मुनिवृन्द की निश्रा में आगामी 2 सितंबर को मरुधर केसरी मिश्रीमल जयंती तथा संत शेरे रूप मुनि जयंती सामायिक, गुणानुवाद सभा व धर्मध्यान के साथ मनाई जाएगी। संचालन सुरेश मूथा ने किया।

रिश्ता वही जो रास्ता दिखाए
बेंगलूरु. सीमंधर शांतिसूरी जैन ट्रस्ट, वीवीपुरम में आचार्य चंद्रभूषण सूरी ने कहा कि कर्म से हर व्यक्ति के संबंध किसी न किसी के साथ जुड़े हुए हैं, लेकिन उस संबंध में ममत्व रहने से कर्म बंधन प्राप्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि संबंध ऐसे होने चाहिए कि जिसमें बंधन न हो। आजकल के खून के संबंध भी राग, द्वेष से भरे पड़े हैं। एकमात्र स्वार्थ से संबंध चल रहे हैं। रिश्ता वही होना चाहिए जो रास्ता दिखाए। दोस्ती वही कहलाती है जो दिशा दिखाए। संबंध वही सच्चे हैं जिसमें कोई बंधन न हो।
संबंध में ममता न रखें। आचार्य ने तपस्वी सविताबेन मांगीलाल बाफना को आशीर्वाद प्रदान किया। दिनेश सोनीगरा ने पारणा कराया।