
हंसी-ठहाकों के बीच लगे महिला शक्ति की जय के नारे
बेंगलूरु. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शनिवार को राजस्थान पत्रिका कार्यालय में महिलाओं के ठहाके गूंजे, गीतों की महफिल सजी, महिलाओं के त्याग व बलिदान के साथ ही समाज व देश के विकास में उनकी भूमिका व योगदान पर जमकर चर्चा हुई। इस दौरान महिलाओं ने हुंकार भरी, महिला शक्ति जिंदाबाद के नारे भी लगाए।
परिचर्चा में महिलाओं ने खुलकर अपने विचारों व भावनाओं को अभिव्यक्त किया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों की प्रबुध्द महिलाओं के साथ ही घर-परिवार संभालने, सहेजने वाली महिलाओं ने भी महिलाओं की दिशा व दशा पर विचार व्यक्त किए। परिचर्चा के फेसबुक लाइव प्रसारण के दौरान महिलाओं को तनाव मुक्ति के लिए योग प्रशिक्षक महिला ने योग सिखाया तो कैंसर विशेषज्ञ चिकित्सक ने बताया कि महिलाएं कैंसर से बचने के लिए क्या करें और क्या नहीं करें। महिलाओं ने निर्भया मामले में आरोपियों की फांसी की सजा तीन बार टलने पर न्याय प्रक्रिया पर सवाल भी खड़े किए।
जीतो महिला विंग की संयुक्त सचिव चित्रा मेहता ने कहा कि पहले जहां महिला घर से बाहर नहीं निकलती थी, आज फाइटर जैट तक चला रही हैं। उन्होंने निर्भया मामले में बार-बार फांसी की सजा टलने पर अफसोस जाहिर किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय पर लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिएजरूरी है कि न्याय हो और समय पर हो।
राजस्थान संघ की अध्यक्ष रतनी बाई मेहता ने कहा कि वह नेकी की दुकान चलाती हैं। इसके जरिए वे अनचाहे वस्त्र एकत्र कर उन्हें दुरुस्त करवाकर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाती हैं। इस अवसर पर उन्होंने राजस्थान की आन बान और शान को सबके बीच साझा किया। उन्होंने होली गीत... होरिया में उड़े रे गुलाल.. कहियो मंगेतर से..प्रस्तुत किया तो महिलाओं ने ताल से ताल मिलाकर दाद दी।
विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों से जुड़ी साहित्यकार डॉ. इन्दु झुनझुनवाला ने कविता, हां मैं औरत हूं... प्रस्तुत किया। इस दौरान महिलाओं ने सुर में सुर मिलाकर उनका साथ दिया। डॉ. इन्दु ने इस कविता के माध्यम से महिला के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन कर तालियां बटोरीं।
जानी मानी योग प्रशिक्षक प्रीति योगिनी ने इस अवसर पर महिलाओं को तनाव मुक्त रखने के लिए अनेक प्रकार के योग बताए। उन्होंने कहा कि ध्यान व योग के जरिए खानपान पर ध्यान देकर बड़ी से बड़ी बीमारी से मुक्ति पाई जा सकती है। उन्होंने महिलाओं के लिए प्राणायाम को रामबाण बताया।
जीतो महिला विंग की उपाध्यक्ष अनिता सुमन पिरगल ने कहा कि युवतियों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि युवतियों को कभी भी हरेक की बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। हर मां को चाहिए के वह अपने बच्चों को निडर बनाए। उन्होंने कहा कि हर घर में मां संस्कार दे तो बच्चों में संस्कार बढ़ेंगे।
हम जैन समाजसेवी संगठन की संस्थापक मंजू दिनेश लुंकड़ ने कहा कि वे भी कैंसर रोग के बचाव के लिए कार्य कर रही हैं। इसके लिए वे शिविर आयोजित कर महिलाओं की जांच भी कराती हैं। जरूरत मंद महिलाओं का उपचार भी निशुल्क कराती हैं।
गृहिणी उषा नाहर ने कहा कि वे स्वास्थ्य के अनुकूल भोजन बनाने का व्यवसाय कर रही हैं। किसी को बीमारी में क्या खाना चाहिए, उस बीमारी के मुताबिक खाना बनाकर देती हैं।
जीव दया समिति की अध्यक्ष शारदा चौधरी ने बताया कि राजस्थान में 15 हजार नीम के पौधों का रोपण करवा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वे अब तक तलाक के जरिएदूरी बना चुके 300 दम्पतियों को पुन: एक करके उजड़ा हुआ घर बसा चुकी हैं। अंत में महिलाओं ने पत्रिका से अपने लगाव का इजहार किया और अभिव्यक्ति के लिए मंच उपलब्ध कराने पर धन्यवाद दिया।
अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरुक रहें महिलाएं
मायशाह फाउंडेशन की संस्थापिका व कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. आशु शाह ने ब्रेस्ट कैंसर के बारे में विचार साझा किए। उन्होंने ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण, पहचान व उससे कैसे बचा जाए इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं में तीन तरीके के कैंसर अक्सर पाए जाते हैं। उन्होंने बिना चिकित्सालय जाए अपने स्तर पर ही ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण का पता लगाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विश्व में ब्रेस्ट कैंसर के सर्वाधिक रोगी हैंं। इसलिए महिलाओं को इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे बचाव के लिए एक टीका आया है जो 9 से 19 वर्ष की आयु में दो बार लगाना होता है। डॉ. आशु ने खाने को दुबारा गर्म कर खाने के भी दुष्परिणाम बताए।
Published on:
08 Mar 2020 01:24 am

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