Herpetologist डॉ. पी. गौरी शंकर और प्रशांत के नेतृत्व में उनकी टीम ने सोमवार को उडुपी जिले के हेबरी तालुक के नदपाल गांव के एक घर के बाहरी परिसर से करीब 15 फीट लंबा किंग कोबरा पकड़ा। इस कोबरा का वजन करीब 12.5 किलोग्राम निकला। कोबरा को वापस जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
डॉ. शंकर ने बीते 20 वर्षों के दौरान 500 से ज्यादा King Cobra को बचाया है। 50 से ज्यादा किंग कोबरा घोंसलों की निगरानी और अध्ययन किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने 500 से अधिक किंग कोबरा के बच्चों को वापस जंगल में छोड़ा है।
उन्होंने पत्रिका को बताया कि आमतौर पर, किंग कोबरा का औसत वजन 3.5 से 7 किलोग्राम (मादा 2 से 3.5 किलोग्राम, नर 3.5 से 6 किलोग्राम) के बीच होता है। हालांकि, उन्होंने सोमवार को जो कोबरा पकड़ा वे उनके जीवन का सबसे लंबा और सबसे ज्यादा वजन वाला है। मलनाड के इन क्षेत्रों में ऐसे स्वस्थ नर किंग कोबरा को पनपते हुए देखना खुशी की बात है। यह शिकारी और शिकार की स्वस्थ आबादी का प्रमाण है। किंग कोबरा दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के मूल निवासी हैं और थाईलैंड में 18 फीट तक की लंबाई तक पहुंचने के लिए जाने जाते हैं।
Kalinga Foundation के निदेशक व सह संस्थापक Dr. P. Gauri Shankar ने बताया कि फरवरी से मई तक किंग कोबरा का प्रजनन काल होता है। यह वर्ष का वह समय है जब ये सांप सक्रिय रूप से संभोग के लिए साथी की तलाश करते हैं। इसके परिणामस्वरूप उच्च मानव-सर्प संघर्ष होता है। ऐसे संघर्षों को कम करने के कलिंगा फाउंडेशन के मिशन के हिस्से के रूप में, टीम साल के किसी भी अन्य समय की तुलना में फरवरी से मई के बीच सबसे ज्यादा सांपों को बचाती है।