
अहंकार व्यक्ति को नशे में मदहोश कर देता है-आचार्य देवेंद्रसागर
बेंगलूरु. राजस्थान जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ जयनगर में आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने कहा कि रावण तो विद्वान और प्रकांड पंडित था, लेकिन अभिमान ने उसकी बुद्धि हर ली थी। यह अभिमान उसकी सारी विद्वत्ता पर भारी पड़ा। इसके चलते उसका सब कुछ- परिवार, राज्य, बल, बुद्धि, विद्वता, ख्याति समाप्त हो गया और वह हमेशा के लिए राक्षस राजा के रूप में पहचाना जाने लगा। अहंकारी को बदनामी और अहंकार रहित को नेकनामी मिलती है। घमंडी का सिर नीचा एक प्रचलित मुहावरा है। इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति घमंड करता है, समाज में उसकी उपेक्षा हो जाती है और वह गुमनामी के अंधेरे में डूबकर मर जाता है। कितना भी अच्छे व्यक्तित्व वाला इंसान क्यों न हो, यदि वह अहंकारी है तो उसके समस्त गुण उसी तरह धुंधले हो जाते हैं जैसे धधकते अंगारों पर जमी राख की परत अग्नि को धुंधला कर देती है। प्रत्येक इंसान को इसका त्याग कर समभाव और सद्भाव से जीवन जीने का प्रयत्न करना चाहिए। अहं व्यक्ति को नशे में मदहोश कर देता है। वह उस व्यक्ति को न केवल सचाई से परे एक कल्पना लोक में ले जाता है बल्कि जीवन के साथ तालमेल बैठाने वाली परिस्थितियों से भी दूर कर देता है। जिस दिन कुछ होने, कुछ त्यागने का भाव मन में आए, समझ लीजिए कि हर प्रकार के घमंड से मुक्ति का संदेश हमें मिल रहा है। अगर हम उस संदेश को सही ढंग से ग्रहण कर लें तो उसी दिन से हमारे दुखों का अंत शुरू हो जाएगा। आचार्य के अनुसार लोग ईश्वर की सत्ता को मानते हैं, यह मानते हुए भी वह उसे देख नहीं पाते। अहंकार के कारण ईश्वर हमें दिखाई नहीं देते जबकि ईश्वर हमारे बहुत निकट होते हैं। इसी कारण न हमें ज्ञान मिलता है और न ही मुक्ति।
Published on:
03 Jan 2022 07:46 am
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