
अब तक 28.43 करोड़ रुपए की नकदी और अन्य सामग्री जब्त
बेंगलूरु. विधानसभा चुनाव के पूर्व आचार संहित उल्लंघन के मामलों पर निगरानी रखने के लिए चुनाव आयोग द्वारा गठित निगरानी एवं उडऩ दस्तों ने अब तक की अपनी कार्रवाई में 28.43 करोड़ रुपए की अवैध सामग्री और नकदी जब्त की है। इनका उपयोग मतदाताओं के बीच प्रलोभन के लिए किया जाना था।
बेंगलूरु प्रेस क्लब एवं बेंगलूरु रिपोर्टर्स गिल्ड द्वारा शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी संजीव कुमार ने कहा कि २५०० से ज्यादा निगरानी दस्ते और उडऩ दस्ते का गठन किया गया है जो पूरे राज्य में कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उडऩ दस्ते को जीपीएस प्रणाली से युक्त किया गया है जिससे आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत मिलने के तुरंत बाद दल के अधिकारी वहां पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर देत हैं।
उन्होंने कहा कि देश में अन्य अपराधों की तुलना में आचार संहिता उल्लंघन के मामलों में सजा दर भी उच्च है। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों के दौरान दायर मामलों के बारे में उन्होंने कहा कि उस समय दर्ज 1157 मामलों में से 1008 मामलों पर आरोप पत्र दाखिल किया गया और 299 को दोषी ठहराया गया है। इस प्रकार कर्नाटक में सजा दर 26 प्रतिशत रहा जबकि राष्ट्रीय औसत 12 से 16 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि मुकदमेबाजी के मामलों को पूरा करने के बाद सजा की दर बहुत अधिक होगी।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को जन हितैषी बनाने के सारे प्रयास किए जा रहे हैं जिससे मुख्य धारा से कटे समुदाय के लोगों को भी मतदान केन्द्र तक लाने की कोशिशें की जा रही हैं। इसमें आदिवासी और सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाले मतदाताओं के साथ ही किन्नरों और सेक्स वर्करों को मतदान के लिए प्रेरित करने की पूरी कोशिश की जा रही है।
भीषण गर्मी का सामना कर रहे क्षेत्रों में मतदान केन्द्रों को स्थांनातरित करने की संभावनाओं को सिरे से खारिज करते हुए संजीव कुमार ने कहा कि उन क्षेत्रों में मतदाताओं की सुविधा के लिए आवश्यक जरूरतें पूरी की जाएंगी जिससे मतदाताओं के साथ मतदान कर्मियों को कोई परेशानी न हो। इसके तहत मतदान केन्द्रों पर पेजयल व्यवस्था और ओआरएस रखा जाएगा।
पेड न्यूज और उम्मीदवार की खर्च सीमा पर विशेष नजर
पेड न्यूज के सवाल पर उन्होंने चेतावनी देते हुए टीवी चैनलों पर अगर किसी उम्मीदवार का प्रचार किया जाता है तो उस वाणिज्यिक समय के लिए उम्मीदवार पर शुल्क लगाया जाएगा। साथ उस मीडिया गु्रप के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
उम्मीदवारों के लिए निर्धारित २८ लाख रुपए की खर्च सीमा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में एक उम्मीदवार को निर्धारित खर्च सीमा से अधिक खर्च का दोषी पाया गया था जिसके बाद उस जीते हुए उम्मीदवार का निर्वाचन खारिज हो गया था। इसलिए कर्नाटक में भी ऐसे उम्मीदवारों पर चुनाव आयोग सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक उम्मीदवार के खर्च की अलग अलग गणना की जा रही है।
संसद ही बना सकता है चुनाव सुधार का कानून
मतगणना में कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए मिश्रित इवीएम मशीनों के उपयोग की राजनीतिक दलों की मांग पर उन्होंने कहा इसे प्रायोगिक रूप से अपनाया जा सकता है लेकिन बड़े पैमाने पर इसे लागू करने के लिए कानून में बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने दोहराया कि निर्वाचन सुधारों हेतु कानून बनाने की शक्ति चुनाव आयोग के पास नहीं है। चुनाव आयोग जन अधिनियम के प्रतिनिधित्व के प्रावधानों के तहत काम कर रहा है। इसलिए किसी भी तरह के चुनाव सुधार या बदलाव का कानून संसद ही बना सकता है।
Published on:
15 Apr 2018 01:11 am
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