- ऑनलाइन होगा अचल संपत्तियों का विवरण
जमीन के फर्जी दस्तावेजों (fake land documents) से होने वाली धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने अब अचल संपत्तियों का पूरा विवरण ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है।
राजस्व मंत्री आर. अशोक ने बुधवार को विधान परिषद में यह जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि अचल संपत्तियों के पंजीकरण के दौरान ऐसी संपत्तियों के फर्जी दस्तावेज संलग्र किए जाने के कई मामले सामने आए हैं। इसके स्थायी समाधान के लिए अचल संपत्तियों के सभी दस्तावेज अब पंजीकरण कार्यालय में ही ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। जनता दल-एस के गोविंदराजू के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि कई प्रयासों के बावजूद इस समस्या का समाधान संभव नहीं हुआ था। इसलिए सरकार ने अचल संपत्तियों की खरीदी-बिक्री की पंजीकरण की व्यवस्था में ही बदलाव करने का निर्णय लिया है।
आनेवाले दिनों में राजस्व विभाग की ओर से अचल संपत्तियों के दस्तावेज विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। अचल संपत्ति किसके नाम पर है, संपत्ति किसी तालाब या वन क्षेत्र में है? इन सभी बातों का विवरण online उपलब्ध होने से धोखाधड़ी को रोकना संभव हो सकेगा। मंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के कारण अचल संपत्तियों के विवरण से छेड़छाड़ संभव नहीं होगा। अचल संपत्तियों के विवरण में बदलाव केवल राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव के स्तर पर ही संभव होगा। विभाग के अन्य किसी भी स्तर के प्रशासनिक अधिकारी की इसमे कोई भूमिका नही होगी।
सर्वेयरों की संख्या में होगी वृद्धि
कांग्रेस के सदस्य अनिल कुमार के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जो किसान सरकारी भूमि पर कृषि कर रहे हैं, उनकी कृषि भूमि को 'पी’ संख्या दी जाती है। ऐसे किसानों को कृषि भूमि के अधिकृत दस्तावेज नहीं मिलने की समस्या पांच दशक पुरानी है। ऐसे किसान बैंक ऋण जैसी सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं रहे इसलिए अब 'पी’ संख्या बहाल करने की व्यवस्था पर रोक लगाई गई है। इससे इस पांच दशक पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो गया है। उन्होंने कहा कि अब कृषि भूमि के सर्वेक्षण कार्य भी अद्यतन तकनीक के साथ किया जा रहा है। तेजी से सर्वेक्षण के लिए सर्वेयर की संख्या बढ़ाई जा रही है। संवेदनशील मामलों में कृषि भूमि का सर्वेक्षण केवल सरकारी सर्वेयर को ही सौंपा जाता है।