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एकमात्र बेलगाम अधिवेशन की अध्यक्षता की थी गांधीजी ने, कर्नाटक से रहा गहरा नाता

स्वतंत्रता संग्राम में मील का पत्थर साबित हुआ बेलगाम अधिवेशन, बॉम्बे-कर्नाटक क्षेत्र के लोगों के मन में देशभक्ति की भावना भर दी थी 1924 के बेलगाम अधिवेशन ने, 1915 से 1937 तक राज्य में कई बार आए महात्मा गांधी,

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एकमात्र बेलगाम अधिवेशन की अध्यक्षता की थी गांधीजी ने, कर्नाटक से रहा गहरा नाता

एकमात्र बेलगाम अधिवेशन की अध्यक्षता की थी गांधीजी ने, कर्नाटक से रहा गहरा नाता

बेंगलूरु. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर भाजपा, कांग्रेस और जद-एस सहित अन्य दलों के नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने विधानसौधा स्थित गांधी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से फ्रीडम पार्क तक एक सद्भावना यात्रा निकाली।
महात्मा गांंधी का कर्नाटक से काफी गहरा नाता रहा। उन्होंने कई बार राज्य का दौरा किया और कई शहरों में गए। महात्मा गांधी ने सिर्फ एक बार कांग्रेस की अध्यक्षता की और वह भी वर्ष 1924 के बेलगाम अधिवेशन में। यह अधिवेशन देश के स्वतंत्रता आंदोलन में एक मील के पत्थर की तरह है। बेलगावी अधिवेशन ने राज्य के लोगों के मन में राष्ट्रीयता और देशभक्ति की भावना भर दी थी। इससे पहले महात्मा गांधी मई 1915 में पहली बार कर्नाटक आए। यह वो समय था जब वे दक्षिण अफ्रीका से लौटे ही थे। जब वे बेंगलूरु स्टेशन पर उतरे तब उनका राज्य के लोगों और तत्कालीन मैसूर स्टेट ने जोरदार स्वागत किया था। वे कठियावाड़ी वेशभूषा में थे और उनके साथ उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी भी थीं।
दरअसल, मैसूर प्रशासन से महात्मा गांधी का रिश्ता कोई नया नहीं था। इतिहासकार कहते हैं कि जब वे दक्षिण अफ्रीका में थे तब उनके लिए एक फंड जुटाने का कार्यक्रम हुआ था जिसे जीए नाटेसन से आयोजित किया था। वर्ष 1914 की यह बात है जब 1800 रुपए जुटाए गए थे। तत्कालीन मैसूर राज्य के दीवान एम.विश्वेसरैया ने तब 200 रुपए का योगदान किया था। उसी दौरे के दौरान गांधी जी ने गोखले इंस्टीट्यूट में गोपालकृष्ण गोखले के कुछ फोटोग्राफ्स का अनावरण किया था। गोखले गांधी जी के राजनीतिक गुरु थे।
इसके बाद अगस्त 1920 में महात्मा गांधी फिर कर्नाटक आए। इस बार उनका दौरा मेंगलोर का हुआ जो उस समय मद्रास प्रेसिडेंसी का हिस्सा था। उनका यह दौरा असहयोग आंदोलन के प्रचार-प्रसार के लिए था। वे उसी साल फिर एक बार 7 और 8 नवम्बर को बेलगामी के निप्पाणी आए और सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था। 7 जनवरी 1921 को धारवाड़ में एक पुलिस फायरिंग की घटना हुई जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद बडी़ संख्या में नेताओं की गिरफ्तारी हुई। इससे गांधी जी काफी चिंतित हुए और उन्होंने लाला लाजपत राय और शौकत अली को गिरफ्तार नेताओं से मिलने के लिए कर्नाटक भेजा। उन्होंने स्थानीय लोगों की भावनाओं की प्रशंसा की और कहा कि ऐसी घटनाओं से निराश नहीं हों। इसके बाद 1924 में बेलगाम अधिवेशन हुआ जिसने बॉम्बे-कर्नाटक क्षेत्र के लोगों के मन में देशभक्ति की भावना भर दी थी। महात्मा गांंधी को इस अधिवेशन का अध्यक्ष चुना गया था और यह एक मात्र ऐसा अवसर था जब गांधी ने कांग्रेस की अध्यक्षता की।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इतिहास का जिक्र करते हुए पटभिसीतारामय्या ने इस अधिवेशन के महत्व पर काफी कुछ लिखा। दरअसल, तब कांग्रेस नरमपंथी विचार धारा और गरमपंथी विचार धारा में बंटी हुई थी। यहां केवल गांधीजी के ही अध्यक्ष बनने से ही दोनों पक्षों में समझौता संभव था। गांधी ने तब अध्यक्षता संभाली और मुद्दा सुलझ गया। उस समय हिंदुस्तानी संगीत की जानी-मानी गायिका गंगूबाई हंगल एक छोटी बच्ची थीं और उद्घाटन समारोह के दौरान मंगलाचरण पेश की थीं। इसके बाद वर्ष 1934 और वर्ष 1936 में भी महात्मा गांधी ने कर्नाटक का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने छुआछूत के खिलाफ जन-जागरुकता की बात की। दलितों एवं वंचितों के कामकाज, रहन-सहन के बारे में लोगों को जागरूक किया। इसके बाद वर्ष 1937 में उन्होंने खादी को बढ़ावा देने के लिए कर्नाटक का एक और दौरा किया था। इस बार उन्होंने बेलगाम के हुडली स्थित गांधी सेवा संघ की तीसरी वार्षिक बैठक को संबोधित किया।

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