पूरे देश पर 24 घंटे नजर रखेगा जीआइसैट-1

प्रक्षेपण माह के अंत तक
पांच विशेष कैमरे और विशेष टेलीस्कोप से लैस
दो उपग्रह होंगे इस श्रृंखला में

बेंगलूरु.
श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) शार, में भू-अवलोकन उपग्रह जीआइसैट-1 के प्रक्षेपण की तैयारियां चल रही हैं। इस उपग्रह का प्रक्षेपण इसी महीने के अंत तक होने की संभावना है। इसे भू-स्थैतिक प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी-मार्क-2 एफ-10) से लांच किया जाएगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक यह उपग्रह भू-स्थैतिक कक्षा में एक ही जगह स्थित रहकर पूरे देश पर नजर रखेगा। यानी, भू-स्थैतिक कक्षा (जियो स्टेशनरी आर्बिट) से यह उपग्रह लाइव होगा और देश के जिस भू-भाग की जब भी तस्वीरें लेने की जरूरत होगी उसे रीयल टाइम में हासिल किया जाएगा। भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर इस उपग्रह के ऑपरेशनल होने के बाद देश की सीमाओं पर भी निरंतर नजर रखी जा सकेगी। अमूमन दूर संवेदी उपग्रह देश के किसी विशेष क्षेत्र के ऊपर से गुजरने के बाद एक निश्चित समयावधि के बाद ही फिर वहां पहुंचते हैं। चूंकि, पृथ्वी गतिशील है इसलिए अपनी कक्षा में चक्कर लगाते हुए उपग्रह को उसी क्षेत्र के ऊपर पहुंचने के लिए इंतजार करना पड़ता है। लेकिन, जीआइसैट-1 पृथ्वी की ऐसी कक्षा में रहेगा जहां से वह पूरे उपमहाद्वीप पर हमेशा नजर रखेगा। इसरो का कहना है कि यह उपग्रह मौसम की भविष्यवाणी और प्राकृतिक आपदा के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि भारतीय सीमा में होने वाली घुसपैठ पर भी इस उपग्रह से नजर रखी जा सकेगी।
हब्बल दूरदर्शी जैसा टेलीस्कोप
इस उपग्रह में पांच प्रकार के विशेष पे-लोड (उपकरण) हैं। इस उपग्रह में इमेजिंग कैमरों की एक विस्तृत श्रृंखला है जिनमें दृश्यमान, निकट इंफ्रारेड और थर्मल इमेजिंग जैसे फिल्टर लगे हुए हैं। इन कैमरों में नासा के हब्बल दूरदर्शी जैसा 700 एमएम का एक रिची-च्रीटियन प्रणाली दूरदर्शी (टेलीस्कोप) भी लगा हुआ है। इनके अलावा भी कई हाइ-रिजोल्यूशन कैमरे हैं जो उपग्रह की ऑन बोर्ड प्रणाली द्वारा ही प्रबंधित होंगे। यह उपग्रह 50 मीटर से 1.5 किलोमीटर की रिजोल्यूशन में तस्वीरें ले सकता है। इस उपग्रह का वजन लगभग 2१०० किलोग्राम है और इसका प्रक्षेपण जीएसएलवी मार्क-2 से किया जाएगा।
गगनयान मिशन की ट्रैकिंग भी
इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक उपग्रह को श्रीहरिकोटा भेजा जा चुका है जहां रॉकेट के साथ इसके इंटीग्रेशन की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इस श्रृंखला का एक और उपग्रह जीआइसैट-2 भी लांच किया जाएगा। मानव रहित मिशन गगनयान के प्रक्षेपण के दौरान इन दोनों उपग्रहों के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों से लगातार संपर्क रखा जाएगा और उन्हें ट्रैक भी किया जा सकेगा। जीआइसैट-2 का भी प्रक्षेपण इसी साल होने की उम्मीद है।

Rajeev Mishra Reporting
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