
Goo rain makes farmers happy
मैसूरु. पिछले चार साल से औसत से कम बारिश की मार झेल रहे मैसूरु जिले में इस बार मानसून पूर्व की संतोषप्रद बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले २४ घंटे के दौरान जिले में दक्षिण पश्चिम मानसून का प्रवेश हो जाएगा और ६ जून तक जिले में लगातार बारिश होने की संभावना है।
अच्छी बारिश का सपना संजोए किसानों ने कृषि गतिविधियां तेज कर दी हैं। जिले के किसान अपने खेतों को बुआई के लिए तैयार करने लगे हैं। यहां तक कि कपास और तम्बाकू की बुआई भी शुरू हो चुकी है और अनुमानित भूभाग पर इन दोनों फसलों की बुआई अपने अंतिम चरण में है। कृषि विभाग ने इस वर्ष के लिए जिले में ६३,७०० हेक्टेयर भूमि पर तम्बाकू बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया था जबकि बुआई का आंकड़ा ६५,००० हेक्टेयर भूमि का पार कर चुका है। पेरियापट्टण और हुणसूर तालुक को जिले में मुख्य तम्बाकू उत्पादक क्षेत्र माना जाता है और दोनों ही तालुकों में बुआई का लक्ष्य पूरा हो चुका है।
वहीं हुणसूर में बड़े पैमाने पर दलहन की खेती होती है और इस वर्ष १९,००० हेक्टेयर भूमि पर बुआई का लक्ष्य है, जिसमें करीब ५००० हेक्टेयर पर बुआई हो चुकी है। कपास की बुआई भी अपने चरम पर है और इस वर्ष कृषि विभाग ने जिले में ४६,००० हेक्टेयर भूमि पर कपास बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया है।
अब तक तय लक्ष्य का करीब ८० प्रतिशत बुआई पूर्ण हो चुका है। जिले में एचडी कोटे तालुक को मुख्य कपास उत्पादक क्षेत्र माना जाता है।
इस वर्ष तालुक में करीब ३०,००० हेक्टेयर भूमि पर कपास की खेती का लक्ष्य निर्धारित है, जिसमें २४,००० हेक्टेयर पर बुआई हो चुकी है।
जिले में १.९४ लाख हेक्टेयर पर अनाज और धान की खेती
कृषि विभाग ने जिले में मक्का, ज्वार, रागी जैसे अनाज और धान की खेती के लिए १.९४ लाख हेक्टेयर में बुआई का लक्ष्य रखा है। अब तक करीब २६,००० हेक्टेयर भूमि पर इन फसलों की बुआई हुई है।
जहां मक्का, ज्वार और रागी की खेती बारिश की प्रधानता वाले क्षेत्रों में होती है वहीं धान की खेती कावेरी नदी पर बने जलाशयों से संबंधित नहरों के सिंचाई पर आश्रित है, क्योंकि धान की खेती में सिंचाई हेतु ज्यादा पानी चाहिए। ऐसे में इस वर्ष अच्छी बारिश की संभावना से किसानों की उम्मीद है जगी है कि उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।
Published on:
03 Jun 2018 06:00 pm
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