
हर कोई खुश रहे, हर कोई स्वस्थ रहे। यही चिकित्सा सेवा का अंतिम लक्ष्य है। चिकित्सा सेवा सबसे बड़ी मानवीय और दैवीय सेवा है। चिकित्सकों को अक्सर भगवान का रूप माना जाता है। अगर युवा स्नातक ईमानदारी और करुणा के साथ समाज की सेवा करते हैं, तो वे न केवल सफल चिकित्सक बनेंगे बल्कि अपने करियर में उत्कृष्टता भी हासिल करेंगे।
ये बातें राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने निम्हांस के सभागार में कही। वे मंगलवार को राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (आरजीयूएचएस) के 27वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल गहलोत ने चिकित्सा विज्ञान में भारत की समृद्ध विरासत को रेखांकित करते हुए आयुर्वेद और चिकित्सा के जनक माने जाने वाले महर्षि चरक और शल्य चिकित्सा के जनक माने जाने वाले महर्षि सुश्रुत जैसे प्राचीन विद्वानों के योगदान पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा, स्वतंत्रता के बाद भारत ने अपने लोगों के समर्पण और नवाचार के कारण चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, टेलीमेडिसिन और रोबोटिक सर्जरी जैसी तेजी से हो रही तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखने की जरूरत है। हालांकि, प्रौद्योगिकी के विकास के बावजूद हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी बनी हुई है। उन्होंने युवा चिकित्सकों से गांवों में सेवा करने और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने में योगदान देने का आह्वान किया।
दीक्षांत समारोह के दौरान विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए डॉ. होम्बे गौड़ा शरत चंद्र, डॉ. गिरीश राव और डॉ. जी.टी. सुभाष को डॉक्टरेट की मानद उपाधियां प्रदान की गईं।अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के अध्यक्ष अजीम प्रेमजी समारोह के मुख्य अतिथि थे। दीक्षांत समारोह में कुल 63,982 उम्मीदवारों को डिग्री और पुरस्कार प्रदान किए गएं। 93 उम्मीदवारों ने कुल 109 स्वर्ण पदक अपने नाम किए। डॉ. गिरीश बी. एस. (डी फार्मेसी) ने सबसे ज्यादा 6 और गन्नयश्री (आयुष) ने चार स्वर्ण पदक जीते।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. शरण प्रकाश पाटिल और आरजीयूएचएस के कुलपति डॉ. डॉ. बी. सी. भगवान ने भी समारोह में हिस्सा लिया।
Published on:
07 May 2025 05:49 pm
बड़ी खबरें
View Allबैंगलोर
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
