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उच्च न्यायालय का आदेश : बीडीए जल्द भूखंड बेचे

बीडीए लैंड ऑडिट से जानेंगे वास्तविकता

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उच्च न्यायालय का आदेश : बीडीए जल्द भूखंड बेचे

बेंगलूरु. उच्च न्यायालय ने शिवराम कारंत और कैंपेगौड़ा लेआउट में भूखंड बेचने का आदेश दिया है। बेंगलूरु विकास प्राधिकरण (बीडीए) जल्दी ही आम नागरिकों को भूखंड बेचगा।

उप मुख्यमंत्री डॉ.जी.परमेश्वर ने शनिवार को बीडीए कार्यालय का औचक दौरा किया और बीडीए की विभिन्न परियोजनाओं के निर्माण कार्यों की समीक्षा की।

समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से कहा कि शिवराम कारंत लेआउट 3,546 एकड़़ में निर्मित किया जा रहा है। बीडीए को केवल 800 एकड़़ भूमि आवंटित की गई है।

बाकी भूमि स्थानांतरित करने की जरूरत है। अगर पूरी जमीन का अधिग्रहण हुआ तो कुल 30 हजार भूखंड बेचे जाएंगे।

बैठक में तय किया गया है कि शिवराम कारंत ले आउट में कई हिस्सों की टेड़ी मेड़ी जमीन को बुलडोजरों से सही किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कार्य के लिए कुल 8,100 करोड़, लेआउट के निर्माण के लिए 6 हजार करोड़ रुपए समेत करीब 16 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है।

यहां 65 किलोमीटर लंबी आठ लेन की सड़क होगी और उसके साथ सर्विस रोड भी होंगी। मेट्रो स्टेशन और मेट्रो ट्रैक के लिए भी भूमि आरक्षित की गई है।

परमेश्वर ने कहा कि बेंगलूरु में भूखंड बेचने में बीडीए को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

बीडीए अपनी भूमि को प्राप्त करने के उद्देश्य से लैंडआडिट शुरू किया है।

बीडीए की कहां भूमि जमीन है और उस पर कितना अतिक्रमण है? न्यायालयों में लंबित मामलों तथा अन्य विवरण संग्रहित करने के लिए लैंड आडिट कराया जाएगा।

साथ ही बीडीए कार्यालय के लिए नए भवन का निर्माण भी होगा। उन्होंने कहा कि केंपेगौडा लेआउट में पांच हजार भूखंड की बिक्री की गई है।

सभी भूखंड लॉटरी के जरिए बेच कर 4,971 लोगों को अधिग्रहण पत्र और मालिकाना हक से संबंधित दस्तावेज दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि बेंगलूरु के विकास के लिए 2031 विजन तैयार किया गया था। अब विजन 2050 करने का फैसला लिया गया है।

14 हजार लोगों ने विजन 2031 पर आपत्ति की थी।

विजन 2050 में होसकोटे, दोड्डबाल्लापुर, आनेकल और दाबसपेट को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। पैरिफेरल रिंग रोड के जरिए इन शहरों को जोड़ा जाएगा।