
मनुष्य का गृहस्थ जीवन कैसा होना चाहिए
बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टनम में दिवाकर गुरु मिश्री दरबार में साध्वी डॉ. कुमुदलता आदि ठाणा सहित सुख-सातापूर्वक विराजमान है। साध्वी मडल ने अपने उद्बोधन में बताया कि मनुष्य का गृहस्थ जीवन कैसा होना चाहिए? इसे उत्तम कैसे बनाया जा सकता है? एक सुश्रावक बनने के लिए अपने सुदेव-सुगुरु और सुधर्म पर श्रद्धा होना नितान्त आवश्यक है। श्रावक वही बनता है जो श्रद्धावान-विवेकवान-क्रियावान होता है।
उन्होंने कहा कि कुछ श्रावक पाक्षिक होते हैं। जिसका पक्ष सुपक्ष है, जो सुदेव-सुगुरु-सुधर्म को मानता है। परिवार, पैसा व पद-प्रतिष्ठा का पक्ष नहीं लेता है। सुदेव वही होते हैं जो इच्छा रहित होते हैं, सुगुरु वह होते हैं जो शिष्य को सत्पथ दिखाए। संप्रदायवाद से परे रखें, और जो हिंसा रहित है वह सुधर्म है, जहां दयाभाव हैं वहां धर्म है। अत: इन तीनों पर श्रद्धा रखने वाले श्रावक को पाक्षिक श्रावक कहा गया है।
कुछ श्रावक नैष्ठिक होते हैं। जिसका व्रतों के प्रति निष्ठा है। जो पाले हुए व्रतों का प्राण प्रण तक पालन करता है। कहीं भी उनका भंग नहीं करता है। अस्थि भंग हो जाए तो कुछ समय के बाद ठीक हो जाती है लेकिन आस्था भंग हो जाए तो कई जन्मों तक सुधरना मुश्किल है। व्रत भंग का अर्थ होता है कई तीर्थंकरों की अशातना। इसलिए जीवन में तीन बातों का अवश्य ध्यान रखें-1.भाई से जंग नहीं 2. पर नारी का संग नहीं 3. व्रत का भंग नहीं। इन तीनों बातों का ध्यान नहीं रखा गया तो जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गुरुभक्त वर्षावास समिति के मंत्री उम्मेद रांका ने बताया कि इस अवसर पर साध्वी डॉ. महाप्रज्ञा, डॉ. पद्मकीर्ति एवं राजकीर्ति भी उपस्थित थीं।
Published on:
28 Jul 2020 09:51 pm
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