
'साराभाई क्रेटर' की तस्वीर साझा कर इसरो ने किया संस्थापक को याद
बेंगलूरु.
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों के जनक विक्रम साराभाई की 101 वीं जयंती पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-2 के टीएमसी कैमरे-2 द्वारा ली गई चंद्रमा के एक क्रेटर की तस्वीर साझा की है। इस के्रटर का नाम कुछ और नहीं बल्कि 'साराभाई क्रेटर' ही है।
दरअसल, चंद्रमा पर अरबों साल से छोटे बड़े पिंड, उल्काएं और लघु ग्रह गिरते रहे हैं। इससे इसकी सतह छोटे-बड़े क्रेटरों से भरी पड़ी है। ऐसे आघातों से बने क्रेटर गोलाकार हैं तो कुछ लघु, सरल, कटोरीनुमा से लेकर बड़े, जटिल और लगभग वृत्तीय आकार के भी हैं। इन्हीं में से एक क्रेटर का नामकरण विक्रम साराभाई के नाम पर हुआ है। चंद्रमा की सतह पर या अंतरिक्ष में किसी भी पिंड के नामकरण के लिए इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (आइएयू) उत्तरदायी है। साराभाई के नाम पर इस क्रेटर के नामकरण के लिए आइएएयू ने वर्ष 1973 में मंजूरी दी थी।
ऐसा है साराभाई क्रेटर
चंद्रमा पर 'साराभाई क्रेटर' आघात से बना क्रेटर है। यह चंद्रमा के उत्तर पूर्वी क्वाड्रेंट में मारे सेरेनेटैटिस में स्थित है। इस क्रेटर का आकार है 7.38 किलोमीटर है और यह लगभग वृत्ताकार है। इसकी शक्ल एक कटोरे जैसी है। चंद्रयान-2 के टीएमसी कैमरे-2 से ली गई तस्वीरों के डिजिटल एलिवेशन मॉडल और थ्रीडी यू के आधार पर यह पता चलता है कि इस क्रेटर की औसत गहराई इसके ऊपरी छोर से 1.7 किमी है। क्रेटर की दीवारें 25 से 30 डिग्री की ढलान लिए हुए है। इसके आसपास के इलाके में 100 किमी के भीतर कोई बड़े क्रेटर नहीं है। साराभाई क्रेटर के पास विशाल लावा मैदान है। इस क्रेटर से लगभग 250 से 300 किमी पूर्व में नासा के अपोल-17 और रूस के लूना-21 अभियानों का लैंडिंग स्थल है। चंद्रमा पर साराभाई क्रेटर देश के लिए गर्व की बात है।
गौरतलब है कि इसरो ने चंद्रयान-2 के लैंडर का नाम भी विक्रम साराभाई के नाम पर 'विक्रम' रखा था। हालांकि, इसरो को चंद्रमा के दक्षिणी धु्रव पर सॉफ्ट लैंडिंग में सफलता नहीं मिली। लेकिन, आठ उन्नत पे-लोड (उपकरणों) से लैस चंद्रयान-2 का आर्बिटर चंद्रमा के लगभग 100 किमी वाली कक्षा में परिक्रमा कर रहा है। उम्मीद है कि यह कम से कम 7 साल तक चांद की कक्षा में परिक्रमा करते हुए विभिन्न प्रयोगों को अंजाम देगा और कई रहस्यों से पर्दा उठाएगा है।
Published on:
12 Aug 2020 07:19 pm
