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कुमारस्वामी सरकार के इस कदम ने लगाई तेल की कीमतों में आग

बिक्री कर बढ़ोत्तरी से सालाना ५०० करोड़ की राजस्व वृद्धि का अनुमान

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बेंगलूरु. आम नागरिकों के लिए महंगाई की मार बढ़ाने वाला फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने पेट्रोलियम उत्पादों पर बिक्री कर बढाने का आलोचनात्मक निर्णय लिया है।
संयोग से हाल के समय तक डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर जद-एस और कांग्रेस लगातार केंद्र की मोदी सरकार की आलोचना कर रही थी, इसके बावजूद कुमारस्वामी सरकार ने स्थाई रूप से कीमतें बढ़ाने वाला निर्णय लेने में कोई संकोच नहीं किया। मुख्यमंत्री ने पेट्रोल पर मौजूदा ३० प्रतिशत बिक्री कर बढ़ाकर ३२ और डीजल पर १९ को बढ़ाकर २१ प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया। इससे पेट्रोल में १.१४ रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत में १.१२ रुपए प्रति लीटर बढ़ोत्तरी होगी।
राज्य के खजाने में पेट्रोलियम उत्पादों से अब तक सालाना करीब ११,००० करोड़ रुपए का राजस्व आ रहा था, इस वृद्धि के बाद ५०० करोड़ रुपए की राजस्व बढ़ोत्तरी होगी। इस प्रस्ताव ने आम जनता और उद्योगों को समान रूप से निराश कर दिया है क्योंकि बढोत्तरी का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार लगातार ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण आलोचना से घिरी है।
प्रस्ताव का बचाव करते हुए कुमारस्वामी ने कहा है कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में यहां पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत कम है। यहां तक कि इस प्रस्ताव के बाद भी दक्षिण भारत में पेट्रोल और डीजल की सबसे कम कीमत कर्नाटक में ही है। बिक्री कर बढ़ाने की भाजपा द्वारा आलोचना के सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपा को मोदी सरकार से पूछना चाहिए, जिसने पिछले चार साल में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क को ९.४८ रुपए से बढाकर १९.५० रुपए और डीजल पर ९.४६ रुपए से बढ़ाकर १५.३३ रुपए कर दिया है। चार साल में उत्पाद शुल्क में २३८ प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

गुरुवार को बेंगलूरु में दरें
पेट्रोल : ७६.९४ रुपए प्रति लीटर, डीजल : ६८.४७ रुपए प्रति लीटर

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