
उडुपी. राज्य अभी तक शिक्षा प्रणाली में उत्कृष्टता हासिल नहीं कर पाया है। शिक्षकों और स्कूल भवनों की कमी के कारण अड़चनें हैं। कई स्कूलों में दो शिक्षक और करीब 12 छात्र हैं। स्थानीय लोग कम बच्चों वाले स्कूल बंद करने पर सहमत नहीं हैं। वे अपने बच्चों को उन स्कूलों में भी नहीं भेजते हैं। प्रत्येक ग्राम के लिए एक मॉडल स्कूल बनाने की योजना है।
ये बातें प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा मंत्री बी. नागेश ने शुक्रवार को कही। कुंदापुर प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज का दौरा करने के बाद वे मीडिया को संबोधित कर रहे थे। मंत्री ने कहा कि अभी पांच हजार शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। फिर भी 10-12 हजार शिक्षकों की कमी है। इसे चरणों में ठीक किया जाएगा। 135 साल के इतिहास वाले इस कॉलेज ने देश को महान इंसान दिए हैं।
नई शिक्षा नीति (एनइपी) पर उन्होंने कहा कि यह शिक्षा प्रणाली में एक प्रयोग है। इसके लिए कक्षाओं और प्रयोगशालाओं की आवश्यकता पड़ेगी। दूरदर्शी योजना पर विचार किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि दशहरे की छुट्टियों के बाद मध्याह्न भोजन योजना भी शुरू हो जाएगी।
प्रिंसिपल रामकृष्ण बी. जी. ने बताया कि कॉलेज में 1800 से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ते हैं। कॉलेज के पुस्तकालय को लाइब्रेरियन की जरूरत है। शौचालय व कक्षाओं की भी कमी है।
Published on:
09 Oct 2021 10:48 am

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