
बेंगलूरु. शहर के विक्टोरिया सरकारी अस्पताल व हुबल्ली के केंपेगौड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (किम्स) के कोविड आइसीयू में रोबोट की तैनाती ने चिकित्सकों व नर्सों का काम आसान कर दिया है। संक्रमण दर कम करने में बेहद मदद मिल रही है। मरीज जल्दी स्वस्थ हो रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मियों में मरीजों से कोरोनाव वायरस के प्रसार के मामलों पर लगाम लगी है।
दोनों अस्पतालों के आइसीयू में करीद दो माह पहले ये रोबोट तैनता किए गए थे। हालांकि, विक्टोरिया कोविड आइसीयू के चिकित्सकों के अनुसार कुछ सप्ताह से आइसीयू में मरीज भर्ती नहीं हुए हैं। ऐसे में इन रोबोट्स को अन्य अस्पतालों के आइसीयू में तैनात करने की योजना है।
रोबोट को इस तरह से डिजाइन और प्रोग्रमा किया गया है कि निर्धारित समय पर ये रोबोट मरीजों के बिस्तर तक पहुंच तापमान, रक्तचाप, ऑक्सीजन का स्तर, दिल की घड़कन व श्वसन तंत्र सहित अन्य पैरामीटर की जानकारी चिकित्सकों तक पहुंचाते हैं। रोबाट में लगे कैमरे के जरिए चिकित्सक और मरीज एक दूसरे से बात भी कर सकते हैं। ये रोबोट बैटरी से चलते हैं। दिन में एक बार एक घंटे के लिए इन्हें चार्ज किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव टी. के. अनिल कुमार ने बताया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों के कोविड आइसीयू में पहली बार रोबोट का प्रयोग हुआ है। अन्य अस्पतालों के आइसीयू में भी ऐसी योजना है लेकिन सभी आइसीयू में रोबोट को तैनात करना संभव नहीं है। हालांकि, अन्य अस्पतालों में विशेष कैमरे लगाए गए हैं। इसके सहारे आइसीयू टीम मरीजों से वार्तालाप करती है। अन्य अस्पतालों के कोविड आइसीयू में भी ये कैमरे लगाए जाएंगे।
बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका के विशेष आयुक्त (स्वास्थ्य) डॉ. के. वी. त्रिलोक चंद्र ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार रोबोट व कैमरों से उनका काम आसान हुआ है। मानव संसाधन की कमी से निपटने में मदद मिली है। रोबोट मरीज के पास पहुंच स्वास्थ्य के सभी पैरामीटर की सटिक जानकारी उपलब्ध कराता है। टीक जब भी चाहे रोबोट को किसी भी मरीज के पास भेज सकती है। मरीजों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
किम्स के डॉ. कलिंग बी. इ. ने बताया कि अस्पताल के कोविड आइसीयू में पांच मरीज उपचाराधीन हैं। क्रिटकल केयर टीक के मोबाइल में विशेष ऐप इंस्टॉल हैं। इसी से रोबोट का संचालन होता है। उपचार में शामिल सभी चिकित्सकों तक एक साथ मरीज की जानकारी पहुंची है। ऐप के माध्यम से रोबोट की गति को भी नियंत्रित कर सकते हैं।
प्रदेश कोविड-19 क्रिटकल केयर सपोर्ट टीम के सदस्य डॉ. प्रदीप रंगप्पा ने बताया कि ऑडियो और विडियो दोनों इनपुट मिलने के कारण ये रोबोट कैमरों से ज्यादा प्रभावी हैं। जिन आइसीयू में रोबोट की जगह विशेष कैमरे लगे हैं वहां मरीजों से बात करने के लिए चिकिसकीय दल को अलग उपकरण का उपयोग करना पड़ता है।
Published on:
14 Nov 2021 07:19 pm
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