आचार्य महेंद्र सागर सूरीश्वर एवं राजपद्म सागर के सान्निध्य में शुक्रवार को शांति नगर में चर्च रोड स्थित हेरिटेज सिगनेचर में केसरिया आदिनाथ जिनालय का भूमि पूजन किया गया।
बेंगलूरु. आचार्य महेंद्र सागर सूरीश्वर एवं राजपद्म सागर के सान्निध्य में शुक्रवार को शांति नगर में चर्च रोड स्थित हेरिटेज सिगनेचर में केसरिया आदिनाथ जिनालय का भूमि पूजन किया गया। इससे पूर्व संत राजपद्म सागर ने प्रवचन में लोगों को एकजुट होकर समाज के विकास पर बल दिया।
भूमि पूजन ब्रह्म मुहूर्त में प्रात: पांच बजे शुरू हुआ। इस अवसर पर हेरिटेज सिगनेचर से जुड़े लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में जैन समाज के पारसमल भंसाली, मूलचंद नाहर, अशोक चोपड़ा, मन्नू भाई हेमराज, दिनेश छाजेड़, फूलचंद करबावाला, प्रकाशचंद लोढा, कन्हैयालाल चिप्पड़, तेजराज भंसाली, श्रवण कुमार भंसाली, राजेन्द्र भंसाली, राकेश संचेती, दीपचंद नाहर, प्रकाश चंद मुथा, अशोक सुराणा आदि उपस्थित थे।
‘बेंगलूरु करगा’ महोत्सव निहारने उमड़े श्रद्धालु
बेंगलूरु. तिगलरपेट स्थित धर्मराय स्वामी मंदिर के परिसर से ऐतिहासिक बेंगलूरु करगा महोत्सव की शोभायात्रा निहारने के लिए शुक्रवार को देर रात श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। द्रौपदी की वेषभूषा में करगा ढो रहे व्यक्ति पर जगह-जगह फूल बरसाए गए। देर रात 1.30 बजे शुरू हुई शोभायात्रा का शनिवार सुबह 5.30 बजे समापन हुआ। प्रति वर्ष चैत्र माह की पुर्णिमा को महोत्सव का आयोजन किया जाता है। शहर के इस उत्सव की 350 वर्षों की परंपरा सतत रूप से चल रही है।
इस महोत्सव को धर्मरायस्वामी शक्ति उत्सव भी कहा जाता है। अर्जुन तथा द्रौपदी की प्रतिमूर्तियों की शोभायात्रा निकाली जाती है। इसके अलावा श्रद्धालु कृष्ण, कुंती देवी, धर्मराज, भीम, नकुल सहदेव तथा अभिमन्यु की कांस्य मूर्तियों को सिर पर ढोते हैं। चंद्रमा के आसमान के बीचो-बीच पहुंचने पर रथयात्रा का आगाज होता है।
रथ यात्रा निर्धारित मार्ग पर चली। तिगलरपेटे, नगरथपेट, सिद्धप्पा लेन, भैरवेश्वर मंदिर, कब्बनपेट, राम मंदिर, आंजनेय स्वामी मंदिर, मक्कल बसवण्णा स्ट्रीट, गाणीगरपेट चन्नरायस्वामी मंदिर, चामुंडेश्वरी मंदिर ऐवेन्यू रोड, दोडड्पेटे होकर केआर मार्केट कोटे आंजनेया स्वामी मंदिर परिसर पहुंची। उसके पश्चात कॉटनपेट के मस्तान साहेब दरगाह पहुंची। बाद में बलेपेट, हलेगरडी, एससी रोड के अण्णायम्मा मंदिर होकर शोभायात्रा कुंबारपेट, गोल्लरपेट, किलारी रोड तिगलरपेट होते हुए पुन: सूर्योदय से पहले धर्मरायस्वामी मंदिर के परिसर में पहुंची।