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कर्नाटक के निकाय चुनावों में बढ़त से कांग्रेस को मिली राहत

लोकसभा चुनाव में भी बेहतर प्रदर्शन की आस

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कर्नाटक के निकाय चुनावों में बढ़त से कांग्रेस को मिली राहत

बेंगलूरु. पिछले विधानसभा चुनाव में भाग्य योजनाओं की लोकप्रियता के बावजूद करारी हार का सामने कर चुकी कांग्रेस को शहरी निकाय नतीजों से राहत मिली है। कांग्रेस नेताओं को मानना है यह पार्टी के लिए राजनीतिक बयार बदलने का संकेत है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह मतदाताओं के मौजूदा रुझान और गठबंधन सरकार के प्रति उनकी सोच का भी संकेतक है। वर्ष २०१३ में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही निकाय चुनाव हुए थे, जिसे विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना गया था। उस वक्त कांग्रेस को निकाय चुनाव में बढ़त मिली थी। विधानसभा चुनाव में भी यही रुझान जारी रहा है और कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटी थी। इस बार निकायों के चुनाव विधानसभा के चुनावी जंग के तीन महीने बाद हुए हैं और जीत से कांग्रेस खुश है कि उसके लिए हवा बदली है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर यही रुझान रहा तो अगले साल होने लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को बढ़त मिलेगी। शहरी निकायों के २३०० सीटों के लिए अगले साल के शुरू में चुनाव कराए जाने की संभावना है। भाजपा भी कांग्रेस की इस जीत से चिंतित दिख रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इन नतीजों का असर आम चुनाव में नहीं दिखेगा क्योंकि इस चुनाव में अत्यंत स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों के चेहरे निर्णायक थे जबकि लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय मसले निर्णायक होंगे। हालांकि, जद-एस के तीसरे स्थान पर रहने के बावजूद मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कहा कि अगर दोनों पार्टियों साथ मिलकर लड़ेंगे तो आम चुनाव में भाजपा को धूल चटा देंगे।

13 निकायों में निर्दलियों के पास कुंजी
खंडित जनादेश के कारण एक दर्जन से ज्यादा शहरी निकायों में सत्ता की कुंजी निर्दलियों के पास होगी। दो नगर पालिका और एक कस्बा पंचायत में जीतने वाले सभी उम्मीदवार निर्दलीय ही हैं। चुनाव परिणाम के मुताबिक १२ निकायों में कांग्रेस और जद-एस गठबंधन के पास सत्ता होगी। दोनों दल पहले ही ऐसी घोषणा कर चुके हैं। कांग्रेस ३७, भाजपा ३१ और जद-एस १२ निकायों में अकेले सत्ता में आने की स्थिति में है।