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विश्वास मत से पहले ही कुमार करेंगे शक्ति परीक्षण का सामना

विपक्ष के उम्मीदवार उतारने से विधानसभा अध्यक्ष के लिए बनी चुनाव की स्थिति

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विश्वास मत से पहले ही कुमार करेंगे शक्ति परीक्षण का सामना

बेंगलूरु. मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी शुक्रवार को विधानसभा में अपनी तीन दिन पुरानी सरकार का बहुमत साबित करने से पहले ही शक्ति परीक्षण का सामना करेंगे। नई सरकार ने विश्वास मत पेश करने से पहले विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव कराने का फैसला किया है और विपक्ष ने उम्मीदवार उताकर चुनाव की स्थिति पैदा कर दी है। पंद्रहवीं विधानसभा का दूसरा एक दिवसीय सत्र शुक्रवार दोपहर १२.१५ बजे शुरू होगा और अध्यक्ष पद के लिए भाजपा उम्मीदवार के नाम वापस नहीं लेने की स्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष के.जी. बोपय्या सबसे पहले नए अध्यक्ष का चुनाव कराएंगे। उसके बाद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी विश्वास मत हासिल करने की औपचारिकता पूरी करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में ही सत्तारूढ़ जद (ध)-कांग्रेस गठबंधन का शक्ति परीक्षण हो जाएगा। २२५ सदस्यीय सदन में अभी सिर्फ २२२ सदस्य हैं, जिनमें से १०४ भाजपा, ७८ कांग्रेस, ३७ जद (ध) एवं ०१-०१ बसपा और केपीजेपी के हैं जबकि एक कांग्रेस समर्थित निर्दलीय हैं। आंग्ल-भारतीय समुदाय के एक सदस्य का मनोनयन राज्यपाल करते हैं, जो अभी रिक्त है। विश्वास मत हासिल करने के बाद सरकार इस कोटे की सीट के लिए मनोनयन की सिफारिश करेगी।

रमेश और सुरेश में मुकाबला
सत्तारूढ़ कांग्रेस-जद (ध) गठबंधन ने पूर्व मंत्री के. आर. रमेश कुमार को उतारा है तो विपक्षी भाजपा ने पूर्व मंत्री एस. सुरेश कुमार को उतारा है। रमेश कुमार १९९४ से १९९९ के दौरान भी विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं। कांग्रेस-जद (ध) के बीच सत्ता की साझीदारी को लेकर हुए करार के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष का पद कांग्रेस के कोटे में हैं जबकि उपाध्यक्ष का पद जद (ध) के कोटे में गया है। अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार ने गुरुवार दोपहर विधानसभा सचिव के कार्यालय में नामांकन पत्र दाखिल किए। कांग्रेस उम्मीदवार रमेश कुमार के नाम का प्रस्ताव पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या और उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने किया जबकि भाजपा उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव विधायक सुनील कुमार और सी. एन. अश्वत्थ नारायण ने किया। नामांकन दाखिल करते वक्त रमेश कुमार के साथ कई कांग्रेस विधायक भी विधानसौधा पहुंचे थे। रमेश कुमार छठी बार निचले सदन के सदस्य चुने गए हैं जबकि सुरेश कुमार पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन सदन में ११८ सदस्यों के समर्थन का दावा कर रहा है।
सुरेश कुमार ने कहा कि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बी. एस. येड्डियूरप्पा और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र भरा है। जीत की संभावना के बारे में पूछे जाने पर सुरेश ने कहा कि पार्टी ने संख्या बल सहित अन्य पहलुओं पर विचार करने के बाद ही नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए कहा है। शुक्रवार दोपहर चुनाव के बाद नतीजा सामने आ जाएगा।
सिद्धरामय्या ने विधानसभा सचिव के कक्ष से बाहर आने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि कांग्रेस-जद (ध) ने आपसी सहमति से अध्यक्ष पद के लिए रमेश कुमार को चुना है। उन्होंने कहा कि सदन में संख्या बल के हिसाब से रमेश कुमार का जीतना तय है। सिद्धरामय्या ने कहा कि सुरेश कुमार को जिताने के लिए भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव से पहले सुरेश कुमार नाम वापस ले लेंगे। सिद्धरामय्या ने कहा कि रमेश कुमार पहले भी विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व पांच साल तक निभा चुके हैं। उनके पास कानून का अच्छा ज्ञान है और उनको यकीन है कि वे इस बार भी इस पद पर रहकर अच्छा काम करेंगे।
इस बीच, मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने ने भाजपा के इस कदम के बारे में आश्चर्य जताते हुए कहा कि पार्टी के पास अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए आवश्यक संख्या बल ही नहीं है। भाजपा विश्वामत का सामना करने से पहले ही एक बार हार मान चुकी है और येड्डियूरप्पा को शपथ लेने के दो दिन बाद ही इस्तीफा देना पड़ा था। कुमारस्वामी ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या भाजपा एक ही सप्ताह में दूसरी बार हार का सामना करना चाहती है।

मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी
शुक्रवार को विश्वासमत हासिल करने के बाद कुमारस्वामी अगले एक-दो दिन में अपने दो सदस्यीय मंत्रिमंडल का विस्तार करने की भी तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस और जद (ध) अपने-अपने कोटे के संभावित मंत्रियों के नाम को अंतिम रूप देने मेें जुटे हैं। कांग्रेस से २१ और जद (ध) से ११ मंत्री बनाए जाने हैं। बुधवार को कुमारस्वामी के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ.जी. परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। राज्य मंत्री परिषद में ३४ सदस्य हो सकते हैं, जिसमें से कांग्रेस के कोटे में उपमुख्यमंत्री सहित २२ और जद (ध) के कोटे में मुख्यमंत्री सहित १२ पद हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पार्टी के नेताओं को संभावित मंत्रियों की सूची के साथ दिल्ली बुलाया है।