फरवरी 2024 से आपूर्ति की तैयारी, एचएएल ने झोंकी ताकत, हर साल 16 से 24 विमानों के उत्पादन की क्षमता
बेंगलूरु. स्वदेशी हल्के युद्धक तेजस के उन्नत संस्करण तेजस मार्क-1 ए का उड़ान परीक्षण सितम्बर-अक्टूबर महीने से शुरू होने की उम्मीद है। भारतीय वायुसेना ने 83 तेजस मार्क-1 ए विमानों की खरीद के आर्डर दिए हैं और सार्वजनिक क्षेत्र की विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) अगले साल फरवरी से इन विमानों की आपूर्ति की योजना पर चल रही है।
एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सीबी सीबी अनंतकृष्णनन ने पत्रिका के साथ बातचीत में कहा कि, तेजस मार्क-1 ए की आपूर्ति फरवरी 2024 में शुरू होगी। इसके लिए तेजी से प्रयास हो रहे हैं। निश्चित तौर पर कुछ चुनौतियां हैं। प्रणालियों का सर्टिफिकेशन सबसे महत्वपूर्ण है और हम इसमें प्रगति चाहते हैं। इन तमाम कठिनाइयों और समय-सीमा की पाबंदियों के बावजूद उम्मीद है कि समय से विमानों की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला वैमानिकी विकास एजेंसी (एडीए), भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड (बेल) और विदेशी मूल उपकरण निर्माता कंपनियों (ओईएम) समेत अन्य अंशधारकों के साथ एचएएल मिलकर काम हो रहा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि, विमानों का उड़ान परीक्षण सितम्बर-अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। जब उड़ान परीक्षण शुरू होंगे तब परियोजना में तेजी से प्रगति होगी। उम्मीद है कि, सितम्बर तक तमाम प्रणालियों का संयोजन हो जाएगा।
करार के मुताबिक एचएएल को कुल 83 में से 73 तेजस मार्क-1 ए युद्धक और 10 तेजस मार्क-1 प्रशिक्षु विमान वायुसेना को सौंपना है। ये विमान तेजस के वर्तमान संस्करणों की तुलना में उन्नत होंगे। इसकी युद्धक क्षमता वर्तमान तेजस विमानों से कहीं बेहतर होगी। इसमें एक्टिव इलेक्ट्रोनिकली स्कैंड एर्रे (एइएसए) राडार, इलेक्ट्रोनिक युद्ध प्रणाली (इडब्ल्यू), बीवीआर मिसाइलें, सेल्फ प्रोटेक्शन जैमर (एसपीजे) होंगे जिससे न सिर्फ इसकी मारक क्षमता बढ़ जाएगी बल्कि खुद को बचाने की अद्भूत काबिलियत होगी। युद्धक का रखरखाव आसान होगा जबकि ऑपेरशनल भूमिका बढ़ाई जाएंगी।
अनंतकृष्णन ने कहा कि, वायुसेना को समय पर इन विमानों की आपूर्ति के लिए समुचित कदम उठाए गए हैं। पहले प्रोडक्शन लाइन में 8 तेजस विमानों का उत्पादन होगा। दूसरे प्रोडक्शन लाइन के साथ ही हर साल 16 विमानों के उत्पादन की क्षमता एचएएल के पास है। लेकिन, आगे चलकर नासिक केंद्र का भी उपयोग तेजस मार्क-1ए विमानों के उत्पादन में किया जा सकता है। इससे प्रति वर्ष 24 विमानों का उत्पादन हो सकेगा।