
पीएसएलवी सी-62 की विफलता देश के उभरते अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के लिए भारी नुकसानदायक साबित हुआ है। इस मिशन में निजी क्षेत्र के 7 उपग्रहों का नुकसान हुआ है, जिसमें धु्रव स्पेस के 5 उपग्रह थे। अंतरिक्ष कारोबार में अपना पांव जमाने की कोशिश कर रही इन कंपनियों को इस झटके से उबरना आसान नहीं होगा।
अंतरिक्ष सुधारों के बाद भारतीय स्टार्टअप्स को अपने उपग्रह लांच करने का मौका मिला है, लेकिन अभी ये कंपनियां निजी फंडिंग के सहारे चल रही हैं। हालांकि, उपग्रहों की बीमा कराने की सुविधा है, जिससे मिशन विफल रहने पर पूरे उपग्रह की कीमत मिल जाती है, लेकिन फंड की कमी के कारण इन भारतीय कंपनियों ने बीमा नहीं कराया था। बीमा की राशि पूरे उपग्रह की कीमत की लगभग 50 फीसदी होती है। इतनी बड़ी बीमा राशि वहन की क्षमता नहीं होने के कारण भारतीय स्टार्टअप्स इसरो और उसके प्रक्षेपणयान पीएसएलवी पर भरोसा करते हैं। इस बार उन्हें इस मिशन में बड़ा झटका लगा है, जिससे उबरना उनके लिए आसान नहीं होगा। इसरो भी भारत से लांच होने वाले उपग्रहों और रॉकेट का बीमा नहीं करवाता है, लेकिन विदेशी धरती से लांच होने वाले उपग्रहों के लिए बीमा होती है।
गौरतलब है कि पीएसएलवी के पिछले लगभग 32 वर्षों के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब इसके दो मिशन लगातार विफल हुए हैं।आठ महीने पहले 18 मई 2025 को पीएसएलवी सी-61 से सी-बैंड सिंथेटिक अपर्चर राडार उपग्रह ईओएस-09 लांच गया था, जो देश की सीमाओं की निगरानी और दुश्मनों के ठिकानों का मानचित्रण करने के लिए था, लेकिन प्रक्षेपण के करीब 6 मिनट 20 सेकेंड बाद पीएसएलवी अपने निर्धारित पथ से विचलित हो गया। पीएसएलवी सी-62 भी प्रक्षेपण के करीब 6 मिनट 20 सेकेंड बाद पथ से विचलित हो गया। इस बार पीएसएलवी की विफलता के कारण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) का हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह ईओएस एन-1 (अन्वेष) समेत 15 अन्य उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में नहीं पहुंचाया जा सका। इन 15 उपग्रहों में 7 भारतीय और 8 विदेशी थे।
Published on:
15 Jan 2026 07:24 pm
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