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लोगस्स पाठ प्रकाश पुंज की स्तुति: डॉ. समकित मुनि

शूले स्थानक में प्रवचन

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बेंगलूरु. अशोकनगर शूले जैन स्थानक में श्रमण संघीय डॉ. समकित मुनि ने लोगस्स पाठ के सूत्रों पर विवेचन करते हुए कहा कि इस पाठ में ऐसे प्रकाशमय शब्दों का संग्रह है जिनके माध्यम से हम स्वयं को कामयाब बना सकते हैं। दुनिया में ऐसे प्रकाशमान शब्द बहुत कम हैं जो जीवन को सुरक्षा प्रदान करते हैं। लोगस्स पाठ में दिए शब्द, शब्द नहीं मंत्र रूप हैं।

उन मंत्रों के उच्चारण करने मात्र से जीवन का तम खत्म हो जाता है। लोगस्स पाठ प्रकाश पुंज की स्तुति है। तीर्थंकर का नाम- गोत्र सुनने मात्र से महा पुण्य बन्धता है। तीर्थंकर के नाम में वह शक्ति है, जो भक्ति पूर्वक स्तुति करता है वह स्वयं तीर्थंकर बनने के मार्ग पर आगे बढ़ जाता है।

मुनि ने कहा कि लोगस्स पाठ को श्रद्धा भक्ति पूर्वक स्मरण करें। तीर्थंकर के चरणों में सम्यक प्रणाम होना चाहिए। सम्यक प्रणाम ही परिणाम को बदलने की ताकत रखता है। बिना आस्था के किया गया प्रणाम शिष्टाचार है। श्रद्धा से किया प्रणाम वंदना कहलाता है ।

चेलना की कथा सुनाते हुए मुनि ने कहा कि जिस पल गलत अरमान पनपने लगे उसी पल उस विचार का त्याग कर दो। एक गलत ख्याल हमारे जीवन के सारे उजाले को खत्म कर देता है। जिसका जीवन गलत अरमानों से दूर नहीं रहता उनके जीवन की कथा ही आंसुओं की व्यथा बन कर रह जाती है।
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