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महाराष्ट्र व हरियाणा का जनादेश भाजपा के खिलाफ: सिद्धरामय्या

विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धरामय्या ने दावा किया कि हरियाणा व महाराष्ट्र के चुनाव परिणाम भाजपा सरकार के खिलाफ जनादेश हैं। -चुनाव के दौरान किए गए अधिकतर सर्वे गलत साबित-

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महाराष्ट्र व हरियाणा का जनादेश भाजपा के खिलाफ: सिद्धरामय्या

महाराष्ट्र व हरियाणा का जनादेश भाजपा के खिलाफ: सिद्धरामय्या


बेंगलूरुसिद्धरामय्या ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों ही राज्यों के चुनाव परिणामों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वर्चस्व कम हुआ है। मतदाताओं ने भाजपा के शासन के खिलाफ वोट दिया है जिसे लोकतात्रिक व्यवस्था में स्वीकार कर लिया जाना चाहिए। लोगों ने पिछले लोकसभा चुनाव की तरह भावनात्मक मसलों को अहमियत नहीं दी है। भाजपा पिछले लोकसभा चुनाव में भावनात्मक मसलों को बलबूते पर प्रचंड बहुमत से साथ जीत गई थी।
महाराष्ट्र में पिछली बार 120 सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार पिछड़कर 100 सीटों के करीब ही पहुंच सकी है और हरियाणा में 47 सीटें जीतने वाली भाजपा वहां पर 40 सीटों तक सिमट गई ैहै। दोनों राज्यों में अपने बलबूते पर सरकार बनाने का भाजपा का सपना धरा रह गया है और इससे स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि मोदी के नेतृत्व के प्रति लोगों का विश्वास कम हो रहा है। चुनाव के दौरान किए गए अधिकतर सर्वे गलत साबित हुए हैं।
कांग्रेस पार्टी संसाधनों के अभाव व नेताओं की दल बदलीके कारण अपेक्षित सीटें जीत नहीं पाई लेकिन चेतनता नजर आई है।हरियाणा में गैर भाजपाई सरकार बनने के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। भाजपा का मत प्रतिशत घटा है। पार्टी ने हालांकि चुनाव के दौरान सरकार की उपलब्धियां गिनाने के बजाय कश्मीर व पाकिस्तान के भावनात्मक मसलों को उछाला लेकिन मतदाताओं ने इसे बिल्कुल ठुकरा दिया।
चुनाव मं ईवीएम के इस्तेमाल पर राजनीतिक दलों ने संदेह जताया है। वे यह नहीं कहते कि इन चुनावों में ईवीएम में गड़बड़ी हुई है पर संदेहास्पद ईवीएम के बजाय मतपत्रों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता है। विधानसभा की 15 सीटों के उपचुनाव में कांग्रेस के अधिक सीटें जीतने का दावा करते हुए सिद्धरामय्या ने कहा कि जल्द ही मुख्यमंत्री येडियूरप्पा के त्यागपत्र देने की स्थिति उत्पन्न होगी।महाराष्ट्र के चुनाव में भी मतदाताओं ने दल बदलुओं को ठुकरा दिया है और कर्नाटक में भी ऐसा ही होगा और मतदाता दल बदलुओं को सबक सिखाकर रहेंगे।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उपचुनाव में हमेंं बहुमत मिलने पर भी हम सरकार बनाने के बजाय चुनावों का सामना करना पसंद करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ राहत के मामले में इस सरकार ने आंख, नाक कान सहित पांचों इंद्रियों को खो दिया है और लोगों के घेराव करने से डरकर जिला प्रभारी मंत्री बाढ़ प्रभावित जिलों में जाने से कतरा रहे हैं।