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कभी एचटीटी 40 पर उठाए गए थे कई सवाल, अब वायुसेना की जरूरतें पूरी करने को तैयार

आरंभिक परिचालन के लिए आवश्यक तमाम परीक्षण लगभग पूरे106 बेसिक ट्रेनर खरीद की मंजूरी, बेंगलूरु में ही होगा उत्पादन

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बेंगलूरु.
सार्वजनिक क्षेत्र की विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित किए जा रहे बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट एचटीटी-40 ने आरंभिक गुणात्मक सेवाओं के लिए आवश्यक तमाम उड़ान परीक्षण (पीएसक्यूआर) पूरे कर लिए हैं। अब यह एयरक्राफ्ट वायुसेना की प्रशिक्षण जरूरतें पूरी करने के लिए तैयार है। विमान के सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है और एचएएल के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक जल्द ही इसे प्रारंभिक परिचालन मंजूरी (आइओसी) मिलने की उम्मीद है।

हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 106 एचटीटी 40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट खरीदने की मंजूरी भी दे दी है। पहले चरण में 70 विमान खरीदे जाएंगे और जब वायुसेना इसका परिचालन शुरू कर देगी तब 36 और विमानों की खरीद की जाएगी। हालांकि, अभी यह विमान प्रोटोटाइप स्टेज में है लेकिन, जल्दी ही उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। एचएएल के अधिकारियों के मुताबिक अगले पांच साल तक इस विमान का उत्पादन बेंगलूरु स्थित एचएएल के एयरक्राफ्ट डिविजन में ही होगा। न सिर्फ भारतीय वायुसेना बल्कि श्रीलंका और बांग्लादेश ने भी इस बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट को खरीदने में रुचि दिखाई है।

चार साल बाद बोर्ड ने दी मंजूरी
दरअसल, एचटीटी-40 की सफलता ने एचएएल की विमानों की डिजाइन से लेकर स्वदेशी तकनीक से उसके विकास की क्षमता को फिर से स्थापित किया है। कभी इस परियोजना को लेकर कई सवाल उठे थे लेकिन, अब इसपर गर्व किया जा रहा है। परियोजना से जुड़े एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि ‘एचएएल बोर्ड ने अगस्त 2013 में एचटीटी- 40 के विस्तृत डिजाइन को मंजूरी दी थी क्योंकि, इसे 4 साल के इंतजार के बाद भी रक्षा मंत्रालय और वायुसेना से औपचारिक मंजूरी नहीं मिल पाई थी। परियोजना को लेकर कई स्तरों पर सवाल उठाए गए थे। यह भी कहा गया कि क्या एचएएल को बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट बनाना चाहिए? वो भी तब जब देश ने पहले ही अपनी तत्काल प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ‘पिलाटस पीसी 7 बीटीए’ आयात करने का निर्णय कर लिया था।’

युवा टीम ने किया कमाल
अधिकारी ने कहा कि परियोजना की मंजूरी हासिल करना ही अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन, एचएएल ने न सिर्फ उसे मंजूर किया बल्कि एक युवा टीम को परियोजना पर लगाया। टीम का नेतृत्व प्रशांत भदौरिया (40) को सौंपी गई। आज एचटीटी-40 भारतीय एयरोस्पेस उद्योग में सबसे तीव्र गति से पूरी होने वाले परियोजनाओं में से एक है। इस विमान की डिजाइन और अनुसंधान पूरा होने के एक साल के भीतर पहली उड़ान हो गई । इसके बाद किसी भी विमान परियोजना में सबसे बड़ी बाधा बनने वाले ‘स्पिन परीक्षण’ तक का सफर भी बहुत जल्द पूरा किया गया।

‘6 टर्न स्पिन’ पर खरा
कई विमान परियोजनाएं ‘स्टॉल’ और ‘स्पिन’ टेस्ट में ही नाकाम हो जाती हैं लेकिन, एचटीटी 40 ने 6 टर्न स्पिन जैसे मानदंडों पर भी खुद को साबित किया है। वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने खुद इस विमान में पिछले वर्ष उड़ान भरी और इसकी खूबियों को परखा। वे देश के पहले ऐसे वायुसेना प्रमुख हैं जिन्होंने किसी स्वदेशी विमान के प्रोटोटाइप स्टेज में ही उड़ान भरी है। ‘हनीवेल टीपी 331-12 बी’ इंजन से ताकत पाने वाला यह एयरक्राफ्ट जीरो-जीरो इजेक्शन सीट, वातानुकूलित ग्लास कॉकपिट सहित कई खूबियों से सुसज्जित है और देश के युवा पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए तैयार भी। एचएएल के अध्यक्ष आर. माधवन ने कहा कि परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इसके लिए परियोजना की लगातार समीक्षा की जा रही है।

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