
मां ने यकृत दान कर 3 माह के बेटे को दी जिंदगी
मां ने यकृत का टुकड़ा दान कर तीन माह के बेटे को दोबारा जिंदगी दी। परिवार पश्चिम बंगाल के मिदनापुर का रहने वाला है। चिकित्सकों के अनुसार Karnataka में यकृत प्रत्यारोपण कराने वाला यह सबसे युवा मरीज है।
एस्टर सीएमआइ अस्पताल में यकृत रोग विशेषज्ञ व ट्रांसप्लांट सर्जन Dr. Sonal Asthana ने बताया कि मरीज शंकर (काल्पनिक नाम) का यकृत बिलियरी एट्रेसिया (एक ऐसी स्थिति जहां यकृत के अंदर और बाहर वित्त नलिकाएं जख्मी और अवरुद्ध हो जाती हैं) के कारण फेल हो गया था।
निदान में देरी
डॉ. अस्थाना ने बताया कि यदि शीघ्र निदान किया जाए तो बिलियरी एट्रेसिया को 'कसाई' नामक एक छोटी प्रक्रिया से प्रबंधित किया जा सकता है। दुर्भाग्य से, निदान महत्वपूर्ण समय अवधि के बाद किया गया था और यकृत स्थाई रूप से फेल होना शुरू हो चुका था।
छोटी उम्र, कम वजन बने चुनौती
शंकर की छोटी उम्र और मात्र छह किलो वजन के कारण प्रत्यारोपण चुनौतीपूर्ण था। सौभाग्य से मां का यकृत मैच कर गया। प्रत्यारोपण के बाद शंकर करीब 16 दिनों तक नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआइसीयू) में था। शंकर अब पूरी तरह से स्वस्थ है। पीलिया भी ठीक हो गया है।
हर वर्ष 2000 बच्चों को प्रत्यारोपण की जरूरत
डॉ. अस्थाना ने बताया कि देश में हर वर्ष दो हजार से ज्यादा बच्चों को जीवनरक्षक यकृत प्रत्यारोपण (liver transplant) सर्जरी की जरूरत पड़ती है। केवल 10 फीसदी प्रत्यारोपण ही हो पाते हैं। Biliary Atresia बच्चों में यकृत फेल होने के सबसे आम कारणों में से एक है। अस्पताल ने प्रत्यारोपण लागत का केवल 20 फीसदी लिया। सीएसआर, क्राउडफंडिंग और कुछ दवा कंपनियों के माध्यम से शेष धनराशि जुटाई गई।
Updated on:
03 Aug 2023 08:57 pm
Published on:
03 Aug 2023 08:56 pm
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