नम्मा मेट्रो फेज-2 के अंतर्गत प्रस्तावित करीब 14 किलोमीटर की भूमिगत मेट्रो परियोजना (यूजी खंड) अधर में लटक गई है
बेंगलूरु. नम्मा मेट्रो फेज-2 के अंतर्गत प्रस्तावित करीब 14 किलोमीटर की भूमिगत मेट्रो परियोजना (यूजी खंड) अधर में लटक गई है। दरअसल बेंगलूरु मेट्रो रेल निगम ने भूमिगत खंड के लिए निर्माण कंपनियों के अत्यधिक बोली लगाने के कारण निविदाएं रद्द कर दी हैं और अब तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है कि परियोजना को अब कैसे साकार किया जाएगा? निगम के प्रबंध निदेशक महेन्द्र जैन ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हमने सिविल कार्य के लिए आमंत्रित की गई निविदाएं रद्द कर दी हैं।
उन्होंने कहा, हमने भूमिगत परियोजना के लिए प्रमुख ऋणदाता यूरोपीय निवेश बैंक (ईआईबी) को पत्र लिखा है और उनसे कहा है कि हमें फिर से निविदा आमंत्रण की अनुमति दी जाए।
मेट्रो फेज -२ के गोट्टिगेरे से नागवारा के बीच प्रस्तावित २१ किमी मेट्रो लाइन के अंतर्गत १४ किमी का यूजी खंड बनना है। जैन ने कहा कि यूजी खंड के लागत मूल्य कम करने के लिए एक विशेष उपक्रम (एसपीवी) का गठन किया जा रहा है। पुनर्निविदा में अब मूल स्वरूप भी बदल जाएगा। परियोजना लागत कम करने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया गया है।
इसमें भूमिगत खंड की लम्बाई कम करना और पूरे निर्माण कार्य को एक या अधिकतम दो पैकेजों की निविदा में पूर्ण करना शामिल है। यूजी खंड में पहले नागवारा से बन्नेरघट्टा रोड पर स्वागत रोड के बीच १२ भूमिगत मेट्रो स्टेशनों का निर्माण होना था लेकिन अब इनकी संख्या कम हो सकती है।
एलिवेटेड निर्माण का विकल्प
भूमिगत के एक बड़े हिस्से को एलिवेटेड स्वरूप दिया जा सकता है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि एलिवेटेड लाइन निर्माण में कुछ जगहों पर बड़ी चुनौती है। विशेषकर जिन क्षेत्रों में सडक़ें बेहद संकरी हैं और यातायात का भारी दबाव हैं वहां एलिवेटेड निर्माण कार्य चुनौतीपूर्ण है। इस बीच ऐसी संभावना है कि पोट्री टाउन से नागवारा के बीच एलिवेटेड लाइन के निर्माण का विकल्प चुना जा सकता है क्योंकि बीबीएमपी ने इस सडक़ के चौड़ीकरण का काम भी शुरू किया है। इसी प्रकार कुछ अन्य जगहों पर भी मूल डिजाइन में बदलाव कर लागत राशि कम की जा सकती है।
अनुमान से ६९ प्रतिशत की लगी थी बोली
निगम ने करीब १४ किमी भूमिगत खंड के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए चार पैकेजों वाली निविदा आमंत्रित की थी। निविदा प्रक्रिया के लिए तकनीक चरण में सिर्फ चार निर्माण कंपनियां योग्य पाई गईं लेकिन उन्होंने निगम के अनुमान से लगभग 69 प्रतिशत अधिक लागत उद्धृत किया। चार कंपनियों में एफकॉन इंफ्रास्ट्रक्चर तुर्की की कंपनी थी जबकि तीन अन्य कंपनियां गुलेरमाक, एल एंड टी कंस्ट्रक्शन और आईटीडी सीमेंटेशन इंडिया भारतीय कंपनियां थीं।
इन कंपनियों ने परियोजना के लिए निगम के अनुमानित ५,०४७.५६ करोड़ रुपए की तुलना में ८,५५३ करोड़ रुपए उद्धृत किए। निविदा में भाग लेने वाली कंपनियों ने प्रति किलोमीटर सुरंग निर्माण (भूमिगत मेट्रो स्टेशन के साथ) के लिए ६१० करोड़ निगम का अनुमानित दर बताया जबकि निगम ने इसके लिए मात्र ३६० करोड़ रुपए निर्धारित किया है।
वहीं मेट्रो अधिकारियों के अनुसार अनुमानित लागत कम करने के लिए निगम को निविदा में भाग लेने वाली कंपनियों से बातचीत करने में रूचि नहीं है क्योंकि चारों कंपनियों ने निगम के अनुमान से ३५०५.७८ करोड़ रुपए अधिक का कोट किया है। मेट्रो अधिकारियों का मानना है कि लागत मूल्य की इतनी बड़ी भिन्नता का समाधान सिर्फ बातचीत करने से नहीं सुलझ सकता है। बावजूद इसके अगर कंपनियों बातचीत के लिए अपनी ओर से आगे आती हैं तो निगम लागत मूल्य कम करने पर बात कर सकता है।