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यलहंका के पास 153 एकड़ में बनेगा नया लालबाग, दो महीने में शुरू होगा काम

बेंगलूरु का लालबाग हैदर अली के समय में बनाया गया था। कब्बन पार्क ब्रिटिश काल के दौरान बनाया गया था। एक सदी के बाद भी, बेंगलूरु में एक और बड़ा पार्क नहीं बनाया गया है।

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मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने मंगलवार को वन मंत्री के रूप में अपने दो साल पूरे होने पर अपनी उपलब्धियां सहित भविष्य की योजनाएं साझा कीं।उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में करीब 8,848 वन महोत्सव आयोजित किए गए हैं और वन क्षेत्रों, सड़कों के किनारे और सरकारी जमीन पर करीब 8.5 करोड़ पौधे रोपे गए हैं और उनकी देखभाल की गई है। वर्ष 2023-24 और 2024-25 में कुल 1,20,975 हेक्टेयर में वृक्षारोपण, 25 नए आर्बरेटम और 35 वन विकसित किए गए हैं।

मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले दो वर्षों में किसानों को उनके अपने खेतों और अन्य जगहों पर लगाने के लिए कुल 3.70 करोड़ पौधे वितरित किए गए हैं। राज्य सरकार ने यलहंका के पास मदप्पनहल्ली में 153 एकड़ में एक और बड़ा पार्क बनाने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि बेंगलूरु का लालबाग हैदर अली के समय में बनाया गया था। कब्बन पार्क ब्रिटिश काल के दौरान बनाया गया था। एक सदी के बाद भी, बेंगलूरु में एक और बड़ा पार्क नहीं बनाया गया है। इसलिए, उनके वन मंत्री बनने के बाद, 153 एकड़ जमीन पर पार्क बनाने का निर्णय लिया गया। यह जमीन नीलगिरी उगाने के लिए कर्नाटक वन विकास निगम को दी गई थी। वन विभाग दो जून को इस जमीन का वापस ले लेगा और वहां एक पार्क बनाया जाएगा। पार्क की आधारशिला दो महीने में रखी जाएगी।

मंत्री ने चिंता व्यक्त की कि बेंगलूरु में वन भूमि पर दशकों से अतिक्रमण किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में 128 एकड़ अतिक्रमित वन भूमि को साफ किया गया है। साफ की गई भूमि का बाजार मूल्य लगभग 4,000 करोड़ रुपए है।मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली एचएमटी को 444 एकड़ वन भूमि बेचने से पूरी तरह रोक दिया गया है। इसकी कीमत लगभग 14,300 करोड़ रुपए है। सरकार ने इस वन भूमि को पुन: प्राप्त करने और इसे पार्क के रूप में संरक्षित करने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई चल रही है।