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निम्हांस ने लॉन्च किया आत्महत्या रोकथाम मॉडल ‘सुरक्षा’

- राज्य सरकार के विभागों और निजी कंपनी के सहयोग से आगे बढ़ेगी योजना

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निम्हांस ने लॉन्च किया आत्महत्या रोकथाम मॉडल ‘सुरक्षा’

निम्हांस ने लॉन्च किया आत्महत्या रोकथाम मॉडल ‘सुरक्षा’

बेंगलूरु. राष्ट्रीय मानसिक आरोग्य व स्नायु विज्ञान संस्थान (निम्हांस) Karnataka के जिलों में मानसिक स्वास्थ्य तक पहुंच में सुधार करने और आत्महत्या को रोकने के लिए स्वदेशी पायलट मॉडल फ्रेमवर्क सुरक्षा (सूसाइड, सेल्फ हार्म को ट्रैक करने के लिए सर्विलांस सिस्टम) परियोजना की घोषणा गुरुवार को की। कर्नाटक सरकार के विभिन्न विभागों व एक निजी कंपनी के सहयोग से इसे आगे बढ़ाया जाएगा। आत्महत्या रोकथाम अनुसंधान और निगरानी इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य है।

समुदाय आधारित आत्महत्या रोकथाम मॉडल किसानों, मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों, छात्र समुदायों, मीडिया पेशेवरों और महिलाओं से जुड़े विभिन्न हितधारक समूहों में समुदाय आधारित आत्महत्या रोकथाम कार्यक्रमों की व्यवहार्यता और स्वीकार्यता एवं उनकी लागत-प्रभावशीलता का आकलन करेगा।


NIMHANS की निदेशक Dr. Pratima Murthy ने गुरुवार को कहा कि आत्महत्या की रोकथाम के प्रयासों के लिए समाज के कई क्षेत्रों के बीच समन्वय और सहयोग की आवश्यकता होती है। ये प्रयास समावेशी और एकीकृत होने चाहिए क्योंकि अकेले कोई भी दृष्टिकोण आत्महत्या जैसे जटिल मुद्दे पर प्रभाव नहीं डाल सकता है। विश्वास है कि सुरक्षा परियोजना पहले चरण में बहुत आवश्यक गति प्रदान करेगी और विभिन्न हितधारक समूहों तक पहुंच बनाएगी।

एक वर्ष में 6.5 फीसदी बढ़ोतरी

डॉ. मूर्ति ने बताया कि Suicide के पीछे कई कारण होते हैं। विश्व में हर वर्ष 10 लाख से ज्यादा आत्महत्याएं होती हैं। राष्ट्रीय अपराध रिपोर्ट ब्यूरो (National crime record bureau) की रिपोर्ट 2021 के अनुसार, कर्नाटक में 13,056 आत्महत्याएं हुईं। यह वर्ष 2020 की तुलना में 6.5 फीसदी ज्यादा है। कर्नाटक में आत्महत्या की दर 19.5 फीसदी है, जो राष्ट्रीय औसत 12 फीसदी से अधिक है।

पहले वर्ष में 32 पंचायतों में काम

National Institute of Mental Health and Neuro Sciences में मनोरोग सामाजिक कार्य विभाग में सहायक प्रोफेसर व सुरक्षा परियोजना के प्रमुख डॉ. अनीश वी. चेरयिन ने कहा कि भारत सरकार ने आत्महत्या के मुद्दे को हल करने के लिए राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति को आगे बढ़ाया है। इसी कड़ी में सुरक्षा को तीन चरणों में लागू किया जाएगा। अपने पहले वर्ष में 32 पंचायतों को कवर करेगी। सफलता के आधार पर राज्य स्तर पर लागू किया जाएगा।

देश के विकास में बाधक

ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग, कर्नाटक की अतिरिक्त मुख्य सचिव उमा महादेवन ने कहा कि आत्महत्या हमारे देश के विकास पर एक बड़ा बोझ डालती है। विभिन्न कारणों से कई मरीज उपचार नहीं करा पाते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी कमी है। ऐसे में सुरक्षा परियोजना प्रभावी साबित होगी