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सदन समितियों की सिफारिशों को गंभीरता से ले सरकार: विस अध्यक्ष

कोलीवाड़ बोले, जल्दीबाजी में विधेयक पेश कर बिना चर्चा पारित कराने की परिपाटी अच्छी नहीं

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बेंगलूरु. विधानसभा अध्यक्ष केबी कोलीवाड़ ने सरकार से झील अतिक्रमण, नाइस व बिजली खरीद सहित विभिन्न घोटालों की जांच के लिए गठित सदन समितियों की सिफारिशों को गंभीरता से लेने का अनुरोध किया है। कोलीवाड़ ने शनिवार को यहां नाराजगी जताते हुए कहा कि विभिन्न घोटालों की जांच के लिए गठित दोनों ही सदनों के सदस्यों ने सबूत जुटाकर सरकार से कार्रवाई की सिफारिशें की हैं लेकिन सरकार ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि सदस्यों द्वारा पेश की गई रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल देना उचित नहीं है? राज्य के विकास, किसानों व आम जनता के हित में सिफारिशों को अहमियत दी जाए। उन्होंने कहा कि अगले अधिवेशन में वे इस मसले पर खुद सरकार से सवाल करेंगे।
झील अतिक्रमण समिति के अध्यक्ष रहे कोलीवाड़ ने कहा कि समिति ने विस्तार से निरीक्षण करने के बाद 10 हजार से अधिक पेज की रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट को सदन में पेश भी कर दिया गया है। इसी तरह नाइस कंपनी के घोटाले व बिजली खरीद घोटाले के संबंध में संपूर्ण विवरण के साथ रिपोर्ट को सदन में पेश किया जा चुका है। लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
कोलीवाड़ ने कहा कि लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में ऐसी रिपोर्ट पर एक निश्चित दिन चर्चा कराई जाती है, जिसमें समिति के अध्यक्ष और सदस्य सभी भाग लेकर विस्तार से चर्चा करते हैं। विधानसभा में भी इसी तरह से एक निश्चित दिन रिपोर्ट पर चर्चा कराने व इस संबंध में सरकार उत्तर देने के लिए कहा जाएगा। इस व्यवस्था को सदन की नियमावली में शामिल करने का उन्होंने कहा था लेकिन इस पर अब तक अमल नहीं हो सका है।
उन्होंने कहा कि अधिवेशन में वे विधायकों के कार्य से संतुष्ट नहीं हैं। कुछ लोग विस्तार से अध्ययन कर बहस में हिस्सा लेते हैं पर कुछ सदस्य केवल अपने क्षेत्र तक ही सीमित रहते हैं। राज्य के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर गंभीरता से चर्चा करने वाले सदस्य बहुत ही कम रह गए हैं।
कोलीवाड़ ने कहा कि विधायकों के इस रवैये को उन्होंने बेंगलूरु और बेलगावी अधिवेशनों में देखा है। नए विधायकों को बहस का अधिक अवसर देकर भी देख लिया, पर वे विधायकों के काम करने के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं। विधानसभा के अधिवेशन में विधायकों को और अधिक सक्रियता से भाग लेने की जरूरत हैं। उनके क्रियाशील होकर काम करने से ही राज्य की ज्वलंत समस्याओं को हल करने का बेहतर वातावरण बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सदन में महत्वपूर्ण विधेयकों को अंतिम समय में पेश करके जल्दबाजी में बिना बहस के ही पारित कराने की परिपाटी सी चल पड़ी है। लेकिन इस पर रोक लगानी ही होगी।