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खारे पानी को मीठे पानी में बदलेगा आइआइएससी का नया संयंत्र

सौर ऊर्जा चालित प्रणाली, सुदूर गांवों में भी हो सकती है स्थापित

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खारे पानी को मीठे पानी में बदलेगा आइआइएससी का नया संयंत्र

खारे पानी को मीठे पानी में बदलेगा आइआइएससी का नया संयंत्र

बेंगलूरु. पीने योग्य पानी की कमी को दूर करने के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान (आइआइएससी) के वैज्ञानिकों ने खारे पानी को शोधित कर पीने योग्य बनाने के लिए एक थर्मल डिसेलिनेशन प्रणाली विकसित की है। यह प्रणाली सौर ऊर्जा से परिचालित होगी। सौर ऊर्जा चालित होने के कारण इस प्रणाली का उपयोग सुदूर ग्रामीण इलाकों में पेयजल समस्या दूर करने में हो सकता है।

आइआइएससी ने कहा है कि, पानी का खारापन दूर करने के लिए अमूमन रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) और थर्मल तकनीक का प्रयोग होता है। थर्मल अलवणीकरण तकनीक खारे पानी को गर्म करने के बाद संघनित वाष्प से ताजा पानी प्राप्त करने की विधि है। लेकिन, इस प्रक्रिया में वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊर्जा आमतौर पर बिजली या जीवाश्म ईंधन से प्राप्त होती है। सौर आसवन विधि का उपयोग बड़े जलाशयों में खारे पानी को वाष्पित करने के लिए किया जाता है जिसमें वाष्प एक पारदर्शी छत पर संघनित होता है। लेकिन, संघनन के दौरान छत पर पानी की एक पतली परत बन जाती है। यह जलाशय में प्रवेश करने वाली सौर ऊर्जा की मात्रा को बाधित करती है जिससे प्रणाली की दक्षता कम हो जाती है।

इससे निपटने के लिए आइआइएससी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने एक ऊर्जा-कुशल सौर-संचालित संयंत्र तैयार किया। आइआइएससी की प्रोफेसर सुष्मिता दास ने कहा कि, नया संयंत्र, सौर तापीय ऊर्जा से चलेगा और अधिक ऊर्जा कुशल होने के साथ ही कम लागत वाला और पोर्टेबल भी है। इसे सुदूर क्षेत्रों में भी आसानी से स्थापित किया जा सकता है जहां बिजली की सतत आपूर्ति सुनिश्चित नहीं है। संघनन के दौरान पानी की परत बनने से रोकने के लिए इस संयंत्र में हाइड्रोफिलिक और सुपरहाइड्रोफिलिक की एक विशेष कंडेनसर लगाया गया है । हाइड्रोफिलिक सतह पर संघनित पानी की बूंदों को सुपरहाइड्रोफिलिक क्षेत्र अपनी ओर खींच लेता है। इससे हाइड्रोफिलिक सतह संघनन के नए सत्र के लिए पुन: तैयार हो जाती है।

इस संयंत्र को डॉ. दास और उनके पीएचडी छात्र नबजीत डेका ने संयुक्त रूप से डिजाइन किया है। संयंत्र में खारे पानी के लिए एक टंकी, एक वाष्पीकरण कक्ष और ताप के क्षरण को बचाने के लिए एक इन्सुलेटिंग कक्ष के भीतर कंडेनसर लगा है। यह प्रणाली न सिर्फ समुद्री पानी बल्कि भू-जल को भी शुद्ध बनाने के काम आ सकती है। शोधकर्ता इस प्रणाली अधिक टिकाऊ और बड़े पैमाने पर पीने योग्य पानी के उत्पादन योग्य बना रहे हैं ताकि, इसे घरेलू और वाणिज्यिक उपयोग में भी लाया जा सके।