बैंगलोर

वोट बैंक के लिए टीपू जयंती का आयोजन : प्रताप सिम्हा

राज्य सरकार एक समुदाय विशेष को खुश करने और वोटबैंक की राजनीति के लिए टीपू जयंती मनाने की जिद कर रही है

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Oct 24, 2017

बेंगलूरु. व्यापक विरोध के बावजूद राज्य सरकार एक समुदाय विशेष को खुश करने और वोटबैंक की राजनीति के लिए टीपू जयंती मनाने की जिद कर रही है। लेकिन संघ परिवार इस वर्ष भी पुरजोर विरोध करेगा। मैसूर-कोड़ुगू क्षेत्र के सांसद प्रताप सिम्हा ने यह बात कही। टीपू जयंती विरोधी संघर्ष समिति की ओर से समिति के विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों के लिए आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या जनता को बताएं कि राज्य सरकार टीपू सुल्तान के कौन से आदर्श को ध्यान रख कर इस कार्यक्रम का आयोजन कर रही है।


उन्होंने कहा कि कन्नड़ तथा संस्कृति विभाग को इस कार्यक्रम का जिम्मा सौंपा गया है। इस विभाग को यह स्पष्ट करना होगा की टीपू सुल्तान ने कन्नड़ भाषा तथा संस्कृति के लिए क्या योगदान किया। टीपू सुल्तान की प्रशासनिक भाषा कन्नड़ नहीं पर्शियन थी। मैसूर गेजेटियर में इसका स्पष्ट उल्लेख है। टीपु सुल्तान ने मैसूरु, चित्रदुर्गा, देवनहल्ली, श्रीरंगपट्टण जैसे शहरों के नामों का इस्लामीकरण किया था। उसके सिक्के भी पर्शियन भाषा में थे।

उन्होंने कहा कि राज्य की आधी आबादी की प्यास बुझानेवाले कृष्णराजसागर (केआरएस) वाणी विलास सागर बांधों का निर्माता, बेंगलूरु शहर में भारतीय विज्ञान संस्थान, एचएएल, भद्रावती स्टिल के लिए भूमि उपलब्ध करने वाले मैसूर के वाडियार वंश का नाश करने वाले टीपू सुल्तान की जयंती मनाना मैसूरु की जनता का अपमान है। टीपू जयंती मनाकर सरकार राज्य के वीर योद्धाओं को अपमानित कर रही है।

लिहाजा इस कार्यक्रम का राज्यव्यापी विरोध किया जाना चाहिए। विश्व हिंदू परिषद के कर्नाटक आंध्र प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री गोपाल ने कहा कि टिपू सुल्तान एक धर्मांध आतंकवादी था, जिसने सत्ता के बलबूते पर राज्य के मडिकेरी तथा केरल के मालाबार में सैकड़ों हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण कराया था। मेंगलूरु में कई चर्च जमींदोज कर ईसाइयों का दमन करनेवाले टीपू की जयंती मनाना क्या धर्मनिरपेक्षता है?

संघर्ष समिति के संचालक तथा कोडवा साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष साहित्यकार ए.कारियप्पा ने कहा कि टीपू के कहर से कोडग़ु संस्थान में 300 से अधिक कोड़वा परिवारों का नामोनिशान मिट गया। यहां की महिलाओं पर टीपू की सेना ने जो कहर बरपाया उसकी कल्पना करना भी असंभव है। समिति के संचालक श्री निवास ने कहा कि संघर्ष समिति की ओर से 25 अक्टूबर से लेकर 10 नवंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में टिपू जयंती के विरोध में प्रदर्शन किए जाएंगे।

Published on:
24 Oct 2017 05:52 am
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